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  • 11 Quick Response Teams Have Been Formed To Remove Waterlogging, And Temporary Hoardings And Archways Have Been Prohibited Until October 1.

रांची21 घंटे पहले

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राजधानी रांची में गुरुवार को महज दो घंटे की तेज बारिश ने नगर निगम के दावों और तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। मात्र 40 एमएम (मिलीमीटर) बारिश में ही पूरा शहर पानी-पानी हो गया; कई प्रमुख सड़कें तालाब बन गईं और नालियां ओवरफ्लो होकर बहने लगीं।

इधर, शुक्रवार को झारखंड में मानसून ने आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी है। इसे देखते हुए नगर निगम के अधिकारी अब पूरी तरह रेस (सक्रिय) हो गए हैं। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने आनन-फानन में स्वच्छता और परिवहन शाखा की एक आपात बैठक बुलाई। शहर में जलजमाव की समस्या को दूर करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 11 क्विक रिस्पांस टीमों (QRT) का गठन किया गया है, जिनमें से 10 टीमें विभिन्न जोन में तैनात रहेंगी।

स्लैब हटाकर होगी नालियों की सफाई, सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगेगा बैन

नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नालियों के ऊपर रखे स्लैब को हटाकर तत्काल गाद (कचरा) निकाली जाए और कच्चे नालों की कटिंग कर पानी का बहाव दुरुस्त किया जाए। उन्होंने यह भी हिदायत दी कि सफाई के तुरंत बाद स्लैब को वापस अपनी जगह लगा दिया जाए, ताकि बाहर निकाला गया कचरा दोबारा नाली में जाकर उसे जाम न करे।

विशेष सफाई अभियान: स्कूल और कॉलेजों के 500 मीटर के दायरे में विशेष सफाई अभियान चलाने, खुले व खतरनाक नालों की बैरिकेडिंग करने और क्षतिग्रस्त स्लैब को तुरंत बदलने का निर्देश दिया गया है।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह बैन: शहर की नालियों के जाम होने का सबसे बड़ा कारण प्लास्टिक कचरा है। इसके खिलाफ शनिवार से शहरभर में एक विशेष जब्ती और जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।

कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर: जलजमाव या जलभराव की समस्या की शिकायत के लिए नगर निगम में एक समर्पित कंट्रोल रूम बनाया गया है। नागरिक टोल-फ्री नंबर 18005701235 और हेल्पलाइन नंबर 9431104429 पर कॉल कर अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।

जमीनी सच्चाई: बड़े हादसे को दावत दे रहे शहर के कई खुले नाले

बरसात से पहले खुले और खतरनाक नालों को घेरने (बैरिकेडिंग) का निगम का दावा जमीन पर अधूरा नजर आ रहा है। शहर के कई इलाके ऐसे हैं जो मानसून के दौरान जानलेवा साबित हो सकते हैं:

खोरहा टोली (कोकर): कोकर स्थित खोरहाटोली में एक बेहद खतरनाक और गहरा नाला है। गौरतलब है कि दो साल पहले इस नाले में एक बाइक सवार बह गया था। हादसे के बाद इसे व्यवस्थित और कवर करने की योजना तो बनी, लेकिन आज तक यह नाला खुला ही पड़ा है।

भाभा नगर (कोकर): कोकर के ही भाभा नगर का बड़ा नाला भी स्थानीय निवासियों के लिए जानलेवा बना हुआ है। सुरक्षा का आलम यह है कि इस नाले को पार करने के लिए लोग ऊपर बांस की अस्थायी सीढ़ी (चचरी) बनाकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने पर यहाँ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।



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