भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

14 जुलाई को दुर्लभ संयोग! आषाढ़ अमावस्या पर करें यह एक उपाय,...


होमताजा खबरधर्म

आषाढ़ अमावस्या पर करें यह एक उपाय, पितरों के साथ भोलेनाथ की भी मिलेगी कृपा

Last Updated:

देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल के अनुसार 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या है. इसके अगले ही दिन से गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है. इस दुर्लभ संयोग पर मौन रहकर स्नान-दान और पीपल में जल अर्पित करें. इससे पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी. भोलेनाथ और मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा प्राप्त होगी.

ख़बरें फटाफट

देवघर: आषाढ़ का महीना हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. इस पूरे महीने में पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है. इसी बीच आषाढ़ अमावस्या भी आने वाली है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है. इस बार आषाढ़ अमावस्या का संयोग और भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसके अगले ही दिन यानी 15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार ऐसा शुभ संयोग बार-बार देखने को नहीं मिलता. यही वजह है कि इस दिन पितरों का तर्पण, स्नान-दान और भगवान शिव की आराधना करने से कई गुना अधिक पुण्य फल मिलने की मान्यता है.

क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है. मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे मौनी अमावस्या के रूप में भी माना जाएगा. उन्होंने बताया कि इस दिन सुबह पवित्र नदी, तालाब या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें और यथासंभव मौन रहकर भगवान भोलेनाथ की पूजा करें. इसके साथ ही पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और पितरों के नाम से तर्पण करें.ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है.

कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए करें उपाय :
ज्योतिषाचार्य के अनुसार आषाढ़ अमावस्या पितृ पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक मानी जाती है. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष या शनि से जुड़ी परेशानियां चल रही हैं, उनके लिए यह दिन बेहद शुभ रहेगा. इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने, दान-पुण्य करने तथा गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने से कई प्रकार के दोषों से राहत मिलने की मान्यता है. खासकर कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए यह तिथि अत्यंत फलदायी मानी जाती है. पंडित नंद किशोर मुद्गल का कहना है कि ऐसा दुर्लभ संयोग बार-बार नहीं बनता, इसलिए श्रद्धालुओं को इस अवसर का लाभ अवश्य उठाना चाहिए.

इस दिन पीपल पेड में जल अर्पण करें
उन्होंने आगे बताया कि आषाढ़ अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी, भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है. इस दिन मौन रहकर पीपल वृक्ष मे जल अर्पण करे.श्रद्धालु यदि पूरे मन से भगवान की आराधना करें, पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें और तिल, काला उड़द, वस्त्र या अन्न का दान करें तो घर में सुख-शांति और आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है. वहीं, इस दिन किसी भी प्रकार के विवाद, क्रोध और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए. जितना संभव हो शांत मन से भगवान का स्मरण करें और अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है और जीवन की कई बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं.

आसाढ़ अमावस्या के अगले दिन गुप्त नवरात्री की हो रही शुरुआत 
सबसे खास बात यह है कि आषाढ़ अमावस्या के ठीक अगले दिन 15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. तंत्र-मंत्र साधना, मां दुर्गा की उपासना और विशेष सिद्धियों के लिए गुप्त नवरात्रि का अपना अलग महत्व माना जाता है. ऐसे में आषाढ़ अमावस्या और गुप्त नवरात्रि का यह दुर्लभ संयोग श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है. यदि इस दिन श्रद्धा, आस्था और विधि-विधान से पूजा-पाठ किया जाए तो पितरों का आशीर्वाद मिलने के साथ-साथ भगवान शिव, मां लक्ष्मी और शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होने की मान्यता है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top