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100 सीएफटी बालू तीन गुना तक महंगा बिक रहा झारखंड में बालू को लेकर सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया है। बालू खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रोक लगने में सिर्फ 18 दिन बाकी है। लेकिन अब तक कैटेगरी-2 के 444 घाटों में से 145 घाटों का टेंडर नहीं हुआ है। जिन 299 घाटों का टेंडर हुआ, उनमें सिर्फ 35 घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिली है और 13 घाटों की ही लीज फाइनल हुई है। यानी अफसरों ने अब तक 286 घाटों की लीज नहीं दी। अधिकारियों की इस सुस्ती के कारण बालू माफिया तेजी से पनप रहे हैं। इसका खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं। लोग तीन गुना से अधिक कीमत पर चोरी का बालू खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। चोरी के 100 सीएफटी बालू की कीमत 7000 रुपए तक पहुंच गई है। रांची में ऐसा बालू 4800 से 5500 रुपए में किल रहा है। टेंडर न होने से वैध तरीके से बालू का खनन नहीं हो रहा है। इससे लोगों को सरकारी कीमत पर बालू नहीं मिल रहा है। उधर, बालू माफिया तेजी से सक्रिय हो रहे हैं। ये माफिया दिन-रात नदी का सीना चीरकर बालू निकाल रहे हैं। उसका अवैध ढंग से स्टॉक कर रहे हैं। ताकि एनजीटी की रोक लने के बाद वे बालू की किल्लत दिखाकर और अधिक कीमत पर बेच सकें। आपके दिए गए आंकड़ों के आधार पर यहाँ दो अलग-अलग और स्पष्ट तालिकाएँ (Tables) दी गई हैं, ताकि जानकारी को आसानी से समझा जा सके: 1. चोरी के बालू (रेत) की दर नोट: गिरिडीह सहित 3 जिलों में एक भी टेंडर नहीं हुआ है। 2. जिलावार घाट और नीलामी की स्थिति एग्रीमेंट की 22 फाइलें डीसी के पास अटकीं 444 बालू घाटों में से अब तक 299 की नीलामी हो चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सिर्फ 13 घाटों से ही बालू का खनन और उठाव शुरू हुआ है। यानी 95% से ज्यादा घाट कागजों में ही फंसे हैं। जानकारी के अनुसार 22 बालू घाटों की एग्रीमेंट फाइलें अलग-अलग जिलों के डीसी कार्यालयों में लंबित हैं। इनमें दुमका में 5, खूंटी में 3, रामगढ़ में 3, रांची में 3, हजारीबाग में 2, गोड्डा में 2, लातेहार में 2, जामताड़ा में 1 और पूर्वी सिंहभूम में 1 घाटों की फाइलें डीसी कार्यालय में अटकी हुई है। ये असर…मकान निर्माण की लागत 40% तक बढ़ गई मनमाने दाम पर लोगों को बालू मिल रहा है। इससे आम आदमी के मकान निर्माण की लागत 30% से 40% तक बढ़ गई है। सरकारी सहायता राशि कम पड़ने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले गरीबों के आशियाने अधर में लटक गए हैं। पुल-पुलियों जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की गति भी बेहद धीमी हो गई हैं। गढ़वा में 150 ट्रैक्टर मालिकों के खिलाफ वारंट गढ़वा| अवैध ढंग से बालू ढो रहे ट्रैक्टर मालिकों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। ऐसे करीब 150 ट्रैक्टर मालिकों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है। दरअसल जिले के 18 बालू घाटों में से सिर्फ एक घाट का टेंडर हुआ है। लेकिन अब तक खनन शुरू नहीं हुआ है। इसके बावजूद यहां खुलेआम बालू का खनन और परिवहन जारी है। इसे देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने बेलचंपा गांव के पास एनएच-39 स्थित टोल प्लाजा पर 20-21 मई का सीसीटीवी फुटेज खंगाला। इसमें 12 घंटे में करीब 200 ट्रैक्टर बालू ढोते मिले। इन ट्रैक्टर का नंबर नोट कर मालिक की पहचान शुरू की। परिवहन विभाग की मदद से इनका पूरा डिटेल्स निकाला गया। इसमें करीब 150 ऐसे लोग सामने आए, जो पहले भी अवैध ढंग से बालू ढोने में पकड़े जा चुके हैं। इसके बाद अनुमंडल कार्यालय ने इनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया। गिरिडीह का बराकर नदी घाट, इसका टेंडर नहीं, फिर भी धड़ल्ले से हो रहा उठाव माफिया स्टॉक करने में जुटे, ताकि और महंगा बेच सके अन्य जिलों में भी बालू की कीमत 4000 रुपए के आसपास पहुंच गई है। अभी 13 घाटों से ही हो रहा है बालू का उठाव। 35 घाटों को मिल चुकी है पर्यावरण स्वीकृति।
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