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India Pakistan Tension: 27वें कारगिल विजय दिवस के मौके पर अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक क्रिस्टीना फेयर ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर बड़ा दावा किया है. उनके अनुसार, पाकिस्तान की भारत से दुश्मनी सिर्फ कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी असली चिंता दक्षिण एशिया में भारत का बढ़ता प्रभाव है. फेयर का कहना है कि अगर कश्मीर विवाद भी खत्म हो जाए, तब भी पाकिस्तान का रवैया नहीं बदलेगा क्योंकि उसका लक्ष्य भारत के उभार को चुनौती देना है.
अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक क्रिस्टीना फेयर का मानना है कि पाकिस्तान की भारत से दुश्मनी की जड़ केवल कश्मीर नहीं है.
देश जब 27वें कारगिल विजय दिवस पर शहीदों के बलिदान को याद कर रहा है, उसी बीच भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है. अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक क्रिस्टीना फेयर का मानना है कि पाकिस्तान की भारत से दुश्मनी की जड़ केवल कश्मीर नहीं है. उनके मुताबिक, पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता दक्षिण एशिया में भारत का लगातार बढ़ता प्रभाव और वैश्विक स्तर पर उसकी मजबूत होती स्थिति है.
क्रिस्टीना फेयर का कहना है कि अगर मान भी लिया जाए कि कल कश्मीर विवाद पूरी तरह खत्म हो जाए, तब भी पाकिस्तान का भारत के प्रति रवैया नहीं बदलेगा. उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच टकराव की वजह केवल सीमा विवाद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की राजनीति है.
‘कश्मीर नहीं, भारत को रोकना है मकसद’
फेयर के मुताबिक, पाकिस्तान की सैन्य और रणनीतिक सोच लंबे समय से इस विचार पर आधारित रही है कि वह दक्षिण एशिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने वाली एकमात्र ताकत है. उनका कहना है कि यही सोच दोनों देशों के बीच लगातार तनाव की बड़ी वजह बनी हुई है.
उन्होंने यह भी कहा कि 1971 के युद्ध में देश के दो टुकड़े होने और बांग्लादेश बनने के बावजूद पाकिस्तान की सैन्य सोच में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया. उनके मुताबिक, पाकिस्तान आज भी खुद को भारत के उभार को रोकने वाली ताकत के रूप में पेश करता है.
‘कश्मीर सिर्फ एक हिस्सा है’
क्रिस्टीना फेयर का कहना है कि कश्मीर विवाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष का केवल एक पहलू है. उनके अनुसार, पाकिस्तान का व्यापक उद्देश्य भारत के क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव को सीमित करना और उसे दक्षिण एशिया की निर्विवाद शक्ति बनने से रोकना है.
कारगिल विजय दिवस पर फिर चर्चा में भारत-पाक रिश्ते
कारगिल विजय दिवस हर साल उन भारतीय सैनिकों की वीरता को याद करने का अवसर होता है, जिन्होंने 1999 के युद्ध में पाकिस्तान की घुसपैठ को नाकाम किया था. यह दिन इस बात की भी याद दिलाता है कि दोनों देशों के बीच शांति की कोशिशें कई बार आतंकवाद, सीमा पार हिंसा और सैन्य तनाव के कारण पटरी से उतरती रही हैं.
हाल के वर्षों में भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना रहा. पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर लक्षित कार्रवाई की थी. इस अभियान में आतंकवादी संगठनों से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया था.