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झारखंड से बड़ी खबर है. यहां के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम तकरीबन 2 साल बाद जेल से बाहर आएंगे. उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. उन्हें बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाला मामले में ED ने गिरफ्तार किया था. उनके ठिकानों पर छापेमारी में तकरीबन 32 करोड़ की नकदी बरामद की गई थी.

पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ. (फोटो साभारः फेसबुक)
रांचीः करीब दो साल बाद झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम जेल से बाहर आने वाले हैं. सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है. रांची स्थित उनके आवास पर मिठाइयां बांटी जा रही हैं और पटाखे फोड़े जा रहे हैं. लंबे समय से जेल में बंद रहने के कारण उनके समर्थक भावुक भी नजर आए. मालूम हो कि उनके ठिकानों पर ईडी की रेड में 32.2 करोड़ कैश बरामद हुआ था.
आलमगीर आलम को बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाला मामले में ED ने गिरफ्तार किया था. 6 मई 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने रांची में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस दौरान उनके करीबी और निजी सचिव संजीव लाल से जुड़े ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी. सबसे बड़ी बरामदगी संजीव लाल के सहायक जहांगीर आलम के घर से हुई, जहां से ED ने करीब 32.2 करोड़ रुपये कैश जब्त किए थे. इसके अलावा अन्य जगहों से भी लाखों रुपये और कथित लेन-देन से जुड़ी डायरी बरामद की गई थी.
हेमंत सोरेन सरकार में थे मंत्री
छापेमारी के बाद ED ने मंत्री के पीएस संजीव कुमार लाल और जहांगीर आलम को गिरफ्तार किया था. पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने के बाद जांच की आंच तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक पहुंची. इसके बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया था. गिरफ्तारी के समय वे हेमंत सोरेन सरकार में ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य मंत्री थे. मामले को लेकर पूरे झारखंड में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी और विपक्ष ने सरकार पर जमकर हमला बोला था.
पंचायत से शुरू की थी राजनीति
आलमगीर आलम ने पहले झारखंड हाईकोर्ट में जमानत की याचिका दायर की थी, लेकिन जुलाई 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख कियाय. अब सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की बेंच ने उन्हें राहत देते हुए जमानत दे दी है. कोर्ट के फैसले के बाद उनके समर्थकों में उत्साह बढ़ गया है. आलमगीर आलम झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं. वे पाकुड़ विधानसभा सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं. इसके अलावा 2006 से 2009 तक झारखंड विधानसभा के स्पीकर भी रहे. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत पंचायत स्तर की राजनीति से की थी और सरपंच चुनाव जीतकर सार्वजनिक जीवन में कदम रखा था.
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कहानी सुनने, गुनने और लिखने का शौकीन. शुद्ध कीबोर्ड पीटक. माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से शिक्षा-दीक्षा. द सूत्र, खबरिया न्यूज़, दैनिक नई दुनिया (अखबार) से सीखते हुए हाल मुकाम News18 है. 5 साल से पत्रकार…और पढ़ें