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207 साल पुराने कोरंटाडीह डाक बंगले की अनसुनी दास्तान


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Korantadih Dak Bunglow Ballia: वक्त के थपेड़ों और गंगा की लहरों के बीच आज भी एक ऐसी इमारत सीना ताने खड़ी है, जो कभी फिरंगियों की सत्ता का सबसे मजबूत केंद्र हुआ करती थी. हम बात कर रहे हैं बलिया के ऐतिहासिक ‘कोरंटाडीह डाक बंगले’ की. करीब 207 साल पुराना यह बंगला सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि अंग्रेजों की ऐयाशी, लगान वसूली के जुल्म और बलिया के सिद्ध संतों के आध्यात्मिक चमत्कार का मूक गवाह है. आइए, इतिहास की परतों को उधेड़ते हैं और जानते हैं कि कैसे इस बंगले में कैद हुए एक संत ने पूरी ब्रिटिश सरकार की चूलें हिला दी थीं.

Korantadih Dak Bunglow Ballia: बलिया के गंगा तट पर स्थित कोरंटाडीह का यह डाक बंगला सन 1819 ईस्वी में बनकर तैयार हुआ था. आज इसे बने हुए लगभग 207 साल पूरे होने जा रहे हैं. अपनी निर्माण शैली और भव्यता के कारण यह ब्रिटिश सरकार का एक बेजोड़ नमूना माना जाता है. इतिहासकार बताते हैं कि यह बंगला अंग्रेजों के लिए एक ‘ऐशगाह’ की तरह था, जहां वे न केवल आराम करते थे बल्कि पूरे इलाके पर नियंत्रण भी रखते थे. इस इमारत के महत्व को देखते हुए कई लेखकों ने अपनी किताबों में इसका जिक्र किया है.

यहीं से तैयार हुआ था ‘भूमि बंदोबस्त’ का ढांचा
प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि इस बंगले का ऐतिहासिक महत्व सिर्फ इसकी उम्र से नहीं, बल्कि यहां लिए गए फैसलों से है. यह वह दौर था जब वर्तमान उत्तर प्रदेश को ‘संयुक्त प्रांत’ के नाम से जाना जाता था. कोरंटाडीह का यह डाक बंगला एक अभेद्य किले की तरह काम करता था, जहां से पूरे इलाके की लगान वसूली की जाती थी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर प्रदेश में ‘भूमि बंदोबस्त’ का जो ढांचा तैयार हुआ, उसकी नींव इसी बंगले में रखी गई थी. उस समय यह क्षेत्र गाजीपुर जिले के अंतर्गत आता था और यह उस जिले का सबसे शानदार डाक बंगला माना जाता था.

जब सिद्ध संतों के चमत्कार से कांप उठे अंग्रेज
इस डाक बंगले के साथ कुछ ऐसी रोचक और अलौकिक कहानियां जुड़ी हैं, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं. बताया जाता है कि उस समय इस क्षेत्र में जंगली नाथ बाबा नाम के एक महान सिद्ध संत रहते थे (जिनका आश्रम आज भी गड़वार में है). जब अंग्रेजों ने किसानों पर लगान का बोझ डाला, तो बाबा किसानों के पक्ष में खड़े हो गए और लगान न देने का नारा बुलंद किया.

क्रोधित होकर अंग्रेजों ने उन्हें इसी डाक बंगले के एक छोटे से जेल में बंद कर दिया. लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने फिरंगियों के होश उड़ा दिए. बाबा एक ही समय में जेल के अंदर और बाहर कई जगहों पर दिखाई देने लगे. अंग्रेजों ने इसे ईश्वरीय चमत्कार माना और डर के मारे उन्हें तुरंत रिहा कर दिया. ऐसी ही एक घटना बलिया के प्रसिद्ध नाथ बाबा के साथ भी हुई थी, जिनके दिव्य स्वरूप को देखकर अंग्रेज अफसर इतने भयभीत हुए कि उन्हें महज एक घंटे में ही आजाद करना पड़ा.

अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही ऐतिहासिक विरासत
आज यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी अंतिम सांसें गिन रही है. गंगा की भीषण कटान के कारण बंगले का एक बड़ा हिस्सा नदी में विलीन हो चुका है. अब इसका बहुत थोड़ा-सा हिस्सा ही शेष बचा है, जो सरकार और प्रशासन की बेरुखी के बावजूद अपनी गौरवगाथा सुनाने के लिए खड़ा है. अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बलिया के इतिहास का यह सुनहरा पन्ना हमेशा के लिए गंगा की लहरों में खो जाएगा.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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