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24 घंटे भजन, सुबह से रात तक भंडारा…ओडिशा, पश्चिम बंगाल के भी...


जमशेदपुर. झारखंड की पहचान सिर्फ उसके जंगल, पहाड़ और खनिज संपदा से ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से भी है. यहां के गांवों में आज भी कई ऐसी परंपराएं जीवित हैं, जो लोगों को आपस में जोड़ने का काम करती हैं. इन्हीं में से एक खास परंपरा है हरि कीर्तन, जो हर साल बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाता है.

24 घंटे चलता है अनुष्ठान
झारखंड के कई गांवों में आपको हरि मंदिर देखने को मिल जाएंगे. इन मंदिरों की खासियत यह होती है कि यहां हर साल 3, 5, 7 या 11 दिनों तक लगातार हरि कीर्तन का आयोजन होता है. इस दौरान पूरे गांव का माहौल पूरी तरह भक्ति में डूब जाता है. 24 घंटे तक चलने वाले इस अनुष्ठान में भजन, कीर्तन, ढोल-नगाड़े, नाच-गान और पूजा-पाठ का सिलसिला बिना रुके चलता रहता है.

इसी परंपरा की एक झलक जमशेदपुर के जयप्रकाश आश्रम में भी देखने को मिल रही है, जहां हाल ही में हरि कीर्तन की शुरुआत हुई है. यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि झारखंड की संस्कृति और एकता को भी दर्शाता है.

कब हुई दिन से रात पता नहीं चलता
ग्रामीण गुरुपदो महतो इस परंपरा के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि हरि कीर्तन करवाना बहुत शुभ माना जाता है. उनके अनुसार, ‘इससे गांव में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. यह आयोजन हमारे लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता.’ सच में, इन 3 से 5 दिनों के दौरान गांव का माहौल इतना जीवंत हो जाता है कि लोगों को समय का पता ही नहीं चलता. रात कब दिन में बदल जाती है और दिन कब रात में, यह महसूस ही नहीं होता.

दूसरे राज्यों से भी आते कलाकाल, लगातार चलता भंडारा
हरि कीर्तन की एक और खास बात यह है कि इसमें सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि झारखंड के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी कलाकार आते हैं. ये कलाकार भक्ति गीत गाकर भगवान की आराधना करते हैं और पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं.

इस दौरान भोजन की भी विशेष व्यवस्था की जाती है. सुबह से लेकर रात तक भंडारा चलता रहता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं. गांव के लोग मिल-जुलकर इस आयोजन को सफल बनाते हैं, जिससे आपसी भाईचारा और भी मजबूत होता है और भक्ति की लहर भी बहती है.

सब हो जाता भक्तिमय
हरि कीर्तन सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की जीवंत परंपरा और सामूहिक संस्कृति का प्रतीक है. यह लोगों को जोड़ने, आस्था को मजबूत करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरने का एक अनोखा माध्यम है. जिस जगह पर यह आयोजन होता है, दूर-दूर से लोग इसमें शामिल होने आते हैं और पूरे क्षेत्र का माहौल ही अलग हो जाता है. यूं लगता है सब भक्तिमय हो चुका है.



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