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जहानाबाद जेल ब्रेक से गिरिडीह शस्त्रागार लूट तक में थी भूमिका ऑपरेशन ‘दौरा पहाड़’ में 2.20 करोड़ के इनामी माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद झारखंड-बिहार में उसके 25 साल के आपराधिक नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2001 से 2026 तक मिसिर के खिलाफ 175 मामले दर्ज हैं। उसके साथ गिरफ्तार 15 लाख के इनामी मेहनत के खिलाफ 137 और एसीएम गौरव के खिलाफ 8 मामले दर्ज हैं। बिहार के बहुचर्चित जहानाबाद जेल ब्रेक की रणनीति बनाने में मिसिर और उसके सहयोगियों की भूमिका थी। नवंबर 2005 में गिरिडीह के होमगार्ड शस्त्रागार से माओवादियों ने 186 राइफलें लूट ली थीं। इससे पहले सितंबर 2001 में हजारीबाग के चर्चू क्षेत्र में सीआरपीएफ जवानों पर हमले में 12 जवान शहीद हुए थे। अक्टूबर 2001 में धनबाद के तोपचांची में जैप जवानों पर हमला कर 13 पुलिसकर्मियों की जान ली गई थी। दोनों घटनाओं में बड़ी संख्या में हथियार लूटे गए थे। पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर हमला, दो अंगरक्षक की हत्या 4 जनवरी 2022 को पश्चिमी सिंहभूम के गोइलकेरा के झिलरुवां में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर हमले में उनके दो अंगरक्षकों की मौत हुई थी। हमलावर दो इंसास और एक एके-47 लूट ले गए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों के दबाव बढ़ने पर माओवादी दस्ते ने जंगलों में आईईडी का इस्तेमाल बढ़ाया। 2025 में छोटानागरा और जराईकेला में आईईडी विस्फोटों में दो सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और कई घायल हुए। मार्च 2026 में किनाबीर जंगल में भी मुठभेड़ के बाद आईईडी विस्फोट में कोबरा के दो जवान घायल हुए थे। बिटकल सोय जंगल में गश्ती दल पर हमला, 26 पुलिसकर्मी शहीद पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर के बिटकल सोय जंगल में पुलिस गश्ती दल पर घात लगाकर किए गए हमले में 26 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। हमले के बाद माओवादी बड़ी संख्या में राइफल, एसएलआर, रिवॉल्वर, पिस्तौल, ग्रेनेड और वायरलेस सेट लूट ले गए थे। पुलिस रिकॉर्ड में इस हमले को माओवादी हिंसा की बड़ी घटनाओं में शामिल किया गया है।
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