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3d laser scanner revolutionizes crime scene investigation with lidar technology


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अब फॉरेंसिक जांच में 99% सटीक होंगे नतीजे! मिनटों में बेनकाब होंगे अपराधी

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FARO 3D Laser Scanner: क्राइम इन्वेस्टिगेशन में FARO 3D लेज़र स्कैनर का इस्तेमाल हो रहा है. यह LiDAR टेक्नोलॉजी से क्राइम सीन का 3D डिजिटल मॉडल बनाता है, जिससे इंसानी गलती कम होती है और जांच आसान होती है.

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नई दिल्ली: क्राइम इन्वेस्टिगेशन को पहले से ज़्यादा आसान और सटीक बनाने के लिए, अब FARO 3D लेज़र स्कैनर का इस्तेमाल किया जा रहा है. डेवेल लाइफ साइंसेज की अवनी ने बताया कि यह स्कैनर पूरे क्राइम सीन को 3D में रिकॉर्ड करने के लिए LiDAR टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है. इससे क्राइम सीन का एक पूरा डिजिटल मॉडल बनता है, जिसे बाद में देखा और जांचा जा सकता है.

कम होगी इंसानी गलती
अवनी ने बताया कि पहले पुलिस को घटनास्थल की फोटो लेनी पड़ती थी, स्केच बनाना पड़ता था और हर चीज की अलग-अलग माप लेनी पड़ती थी. इस दौरान किसी माप के छूटने या गलती होने की संभावना रहती थी. लेकिन 3D स्कैनर पूरे इलाके को एक साथ रिकॉर्ड कर लेता है, जिससे इंसानी गलती की संभावना काफी कम हो जाती है.

बाद में भी ले सकते हैं माप
इस तकनीक की मदद से जांच अधिकारी बाद में भी कंप्यूटर पर पूरे क्राइम सीन को देख सकते हैं. अगर किसी जगह की दूरी या माप दोबारा चाहिए, तो उसे सॉफ्टवेयर के जरिए आसानी से निकाला जा सकता है. इससे जांच में समय भी बचता है और काम ज्यादा आसान हो जाता है.

कई बड़े मामलों में हो चुका है इस्तेमाल
अवनी के मुताबिक, इस तकनीक का इस्तेमाल देश के कई बड़े मामलों में किया जा चुका है. इनमें पहलगाम हमला, तृषा केस और आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर केस जैसे मामले शामिल हैं. इन मामलों में पूरे घटनास्थल का 3D मॉडल तैयार किया गया, जिससे जांच अधिकारियों को घटना को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली.

कैसे करता है काम
स्कैनर को घटनास्थल पर एक जगह रखकर चालू किया जाता है. इसके बाद यह अपने आप चारों तरफ घूमकर पूरे इलाके को स्कैन करता है. अगर जगह बड़ी हो, तो इसे अलग-अलग जगह रखकर स्कैन किया जाता है. बाद में सॉफ्टवेयर की मदद से सभी स्कैन को जोड़कर पूरे घटनास्थल का 3D मॉडल तैयार किया जाता है.

99% से ज्यादा सटीक परिणाम
अवनी का कहना है कि यह तकनीक 99 प्रतिशत से ज्यादा सटीक परिणाम देती है. हालांकि, कोई भी तकनीक 100 प्रतिशत सही नहीं हो सकती, लेकिन इससे जांच में होने वाली गलतियां लगभग खत्म हो जाती हैं. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इस तकनीक में और नए फीचर भी जोड़े जाएंगे, ताकि अपराध जांच और बेहतर हो सके.

About the Author

Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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