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56 में 6 विधायक कहां गायब हो गए? सवाल जीत-हार का नहीं,...


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राज्यसभा चुनाव खत्म हो गया, लेकिन झारखंड की सियासत में असली मुकाबला अब शुरू हुआ है. महागठबंधन के भीतर आरोप, पलटवार और सफाई का दौर जारी है. एक ओर जहां कांग्रेस धोखे की बात कर रही है, वहीं राजद जवाबी हमला बोल रहा है. जबकि, झामुमो कह रहा है कि अब सबको एक कमरे में बैठकर सच का सामना करना होगा. लेकिन, सवाल तो 56 में 6 विधायकों के वोट गायब होने का है. ऐसे में झारखंड महागठबंधन में यह सवाल सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि महागठबंधन के भरोसे और भविष्य का भी बन गया है.

झारखंड: 56 में 6 विधायक कहां गायब हो गए? सवाल जीत-हार का नहीं, भरोसे का! Zoom

राज्यसभा चुनाव में हार के बाद झारखंड महागठबंधन में खींचतान जारी.

रांची. झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद महागठबंधन के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है. कांग्रेस और राजद के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब सार्वजनिक टकराव का रूप ले चुकी है. कांग्रेस जहां अपनी हार के लिए सहयोगी दलों पर धोखा देने का आरोप लगा रही है, वहीं राजद कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है. इस बीच झामुमो ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए गठबंधन के शीर्ष नेताओं से समीक्षा बैठक बुलाने की मांग की है. हालांकि तीनों दल सरकार पर किसी खतरे से इनकार कर रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ रही बयानबाजी ने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं. इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पूरे मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है.

JMM ने कहा-समीक्षा होनी चाहिए

झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रदेश महासचिव विनोद पांडे ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान जो कुछ हुआ, वह चिंता का विषय है और इसकी गंभीर समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी शीर्ष नेताओं को एक साथ बैठकर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो. उन्होंने कहा कि समीक्षा के बाद यदि किसी विधायक की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा. हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस विवाद से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन लगातार चल रही बयानबाजी गठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचा रही है.

कांग्रेस ने विधायकों को बुलाया, एकजुटता दिखाने की कोशिश

दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को प्रदेश कार्यालय तलब किया. शनिवार को पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 16 में से 13 विधायक मौजूद रहे. इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि सभी विधायकों ने पार्टी प्रभारी को मतपत्र दिखाकर ही मतदान किया था. प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि राजद की ओर से लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार होती रहती है, लेकिन कांग्रेस विधायकों की निष्ठा पर सवाल उठाना गलत है. उन्होंने यह भी कहा कि महागठबंधन के 56 वोट होने के बावजूद 6 वोट कहां गए, इसका विश्लेषण पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व कर रहा है.

प्रभारी के राजू के बचाव में उतरी कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने पार्टी के झारखंड प्रभारी के राजू का बचाव करते हुए कहा कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता. मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार केवल कांग्रेस की हार नहीं, बल्कि पूरे महागठबंधन की हार है. उन्होंने कहा कि संख्या बल होने के बावजूद हार होना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं चूक हुई है, जिसकी समीक्षा जरूरी है.

प्रदीप यादव ने BJP पर लगाया आरोप

दूसरी ओर कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और उसकी लड़ाई भाजपा जैसी बड़ी राजनीतिक ताकत से है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पहले से ही हॉर्स ट्रेडिंग की रणनीति बनाकर आई थी और उसी का असर चुनाव परिणाम में दिखाई दिया. उन्होंने कहा कि सभी कांग्रेस विधायकों ने एकजुटता का परिचय दिया है और पार्टी के प्रत्याशी को ही वोट दिया है.

महागठबंधन में तनाव, लेकिन सरकार पर संकट से इनकार

राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस, राजद और झामुमो के बीच बयानबाजी जरूर तेज हो गई है, लेकिन फिलहाल कोई भी दल सरकार पर संकट की बात नहीं कर रहा है. झामुमो ने जहां समीक्षा की जरूरत बताई है, वहीं कांग्रेस भी आत्ममंथन की बात कर रही है. हालांकि जिस तरह सहयोगी दल एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा रहे हैं, उससे यह साफ है कि राज्यसभा चुनाव का असर महागठबंधन की अंदरूनी राजनीति पर गहरा पड़ा है.

वर्तमान राजनीति में स्पष्ट है कि झारखंड की सत्ता में साथ-साथ चल रहे महागठबंधन के सहयोगी अब राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद आमने-सामने नजर आ रहे हैं. कांग्रेस “धोखे” की बात कर रही है, राजद कांग्रेस पर ही सवाल उठा रहा है और झामुमो गठबंधन की छवि बचाने के लिए समीक्षा बैठक की वकालत कर रहा है. साफ है कि एक राज्यसभा सीट की हार ने सहयोगी दलों के बीच भरोसे पर ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसकी गूंज अब सरकार के गलियारों तक सुनाई देने लगी है.

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Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें



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