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Cancer Symptoms In Children: बदलते दौर के साथ कुछ घातक बीमारियां इतनी कॉमन हो गई हैं कि पहले जो कैंसर बढ़ती उम्र की बीमारी मानी जाती थी, अब वो 6 महीने के बच्चे को भी होने लगी है. माता-पिता को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत होती है और घबराने के बजाय समय पर इलाज करवाने से राहत मिलती है.
जमशेदपुर. कैंसर को अक्सर बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता है, लेकिन आज के समय में यह धारणा पूरी तरह बदल चुकी है. अब कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है. 6 महीने के छोटे बच्चों से लेकर 90 साल तक के बुजुर्ग भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं. खास बात यह है कि छोटे बच्चे अपनी परेशानी या दर्द को बता नहीं पाते, इसलिए माता-पिता को उनके स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है. समय पर लक्षणों की पहचान और सही इलाज से कई मामलों में कैंसर का सफल उपचार संभव है.
इन संकेतों पर तुरंत दें ध्यान
सीनियर कैंसर विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम अंसारी बताते हैं कि बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बार-बार बुखार आना, शरीर का कमजोर पड़ना, वजन लगातार कम होना, पेट का असामान्य रूप से फूल जाना, मसूड़ों से खून आना, शरीर पर बिना कारण नीले या काले निशान पड़ना और बच्चे का हमेशा सुस्त रहना ऐसे संकेत हो सकते हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए.
शुरुआती जांच में है फायदा
डॉ. अंसारी के अनुसार, कई बार माता-पिता सोचते हैं कि बच्चा सामान्य संक्रमण या कमजोरी से गुजर रहा है और इलाज में देरी हो जाती है. यही देरी आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकती है. अगर बच्चा लगातार बीमार दिख रहा है, दूध या भोजन ठीक से नहीं ले रहा है या उसकी गतिविधियां अचानक कम हो गई हैं, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. शुरुआती जांच से बीमारी की सही पहचान हो सकती है और उपचार जल्दी शुरू किया जा सकता है.
माता-पिता को रखनी चाहिए नजर
बच्चों को कैंसर से पूरी तरह बचाने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं. गर्भावस्था के दौरान मां को पौष्टिक आहार लेना चाहिए और नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए. जन्म के बाद बच्चे को समय पर टीकाकरण, संतुलित आहार और स्वच्छ वातावरण देना जरूरी है. बच्चे को तंबाकू के धुएं, प्रदूषण और हानिकारक रसायनों के संपर्क से दूर रखना भी महत्वपूर्ण है. साथ ही माता-पिता को बच्चे के व्यवहार और स्वास्थ्य में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर नजर रखनी चाहिए.
घबराएं नहीं, इलाज कराएं
विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का नाम सुनकर घबराने के बजाय जागरूक होना अधिक जरूरी है. आधुनिक चिकित्सा में बच्चों के कई प्रकार के कैंसर का सफल इलाज उपलब्ध है, बशर्ते बीमारी का पता समय रहते चल जाए. इसलिए अगर बच्चे में बार-बार बुखार, पेट फूलना, वजन कम होना, मसूड़ों से खून आना या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता की सतर्कता ही बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने की सबसे बड़ी ताकत है. समय पर पहचान, सही जांच और उचित इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का मुकाबला किया जा सकता है और बच्चे को स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें