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80 साल पुरानी इस होटल का डोसा आज भी लोगों की पहली...


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छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में पुराने बस स्टैंड के पास, चण्डी मंदिर के पीछे स्थित एक छोटी सी होटल पिछले करीब 80 वर्षों से अपने स्वाद और गुणवत्ता के दम पर लोगों के बीच खास पहचान बनाए हुए है. मोहन होटल नाम से प्रसिद्ध यह जगह अब सिर्फ एक होटल नहीं बल्कि बालोद की पुरानी खानपान संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है. यहां 60 और 70 रुपये में बड़ा और स्वादिष्ट डोसा ग्राहकों को परोसा जाता है.

छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में पुराने बस स्टैंड के पास, चण्डी मंदिर के पीछे स्थित एक छोटी सी होटल पिछले करीब 80 वर्षों से अपने स्वाद और गुणवत्ता के दम पर लोगों के बीच खास पहचान बनाए हुए है. मोहन होटल नाम से प्रसिद्ध यह जगह अब सिर्फ एक होटल नहीं बल्कि बालोद की पुरानी खानपान संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है. यहां मिलने वाला डोसा पूरे जिले में खास तौर पर फेमस है. सुबह से लेकर शाम तक यहां लोगों की भीड़ लगी रहती है और कई ग्राहक वर्षों से लगातार यहां नाश्ता करने पहुंचते हैं.

होटल के संचालक मोहन लाल ने कहा कि इस होटल की शुरुआत करीब 80 साल पहले हुई थी. शुरुआती दौर में यहां सिर्फ सादा खाना बनाया जाता था. समय के साथ ग्राहकों की पसंद और मांग को देखते हुए अलग-अलग तरह के नाश्ते और मिठाइयों को शामिल किया गया. आज यहां डोसा, इडली, समोसा, आलुगुण्डा और गुलाब जामुन जैसे कई पारंपरिक स्वाद देसी अंदाज में तैयार किए जाते हैं.मोहन लाल ने बताया कि होटल की सबसे बड़ी पहचान यहां का डोसा है. उनका कहना है कि बालोद जिले में डोसा का ऐसा स्वाद, साइज और कीमत का कॉम्बिनेशन शायद ही कहीं और देखने को मिले.

बालोद में डोसा के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे लोग
60 और 70 रुपये में बड़ा और स्वादिष्ट डोसा ग्राहकों को परोसा जाता है. खास बात यह है कि डोसा बनाने की पारंपरिक शैली को वर्षों से बरकरार रखा गया है. जिससे उसका स्वाद आज भी वैसा ही बना हुआ है.स्थानीय डिलेश्वर देवांगन का कहना है कि मोहन होटल सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी पुरानी पहचान और भरोसे के लिए भी मशहूर है. कई लोग बचपन से नाश्ता करते आ रहे हैं. अब अपने परिवार के साथ भी यहां पहुंचते हैं. होटल की पुरानी शैली, देसी स्वाद और ताजे नाश्ते की वजह से यह जगह बालोद के लोकप्रिय फूड पॉइंट्स में गिनी जाती है.होटल संचालक के मुताबिक, 80 वर्षों का अनुभव उनके हर व्यंजन की गुणवत्ता में साफ दिखाई देता है. यही वजह है कि आज भी बाहर से आने वाले लोग के डोसा का स्वाद लेने जरूर पहुंचते हैं. पुराने जमाने की सादगी और देसी स्वाद को संजोए मोहन होटल बालोद की खानपान परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है.



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