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Ramgram Bamboo House in Maharajganj: रामग्राम में बांस की लकड़ियों से बनाया गया एक बंबू हाउस पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा है. जंगलों के पास स्थित यह बंबू हाउस अपनी अनोखी डिजाइन, शांत वातावरण और प्राकृतिक हरियाली के कारण पर्यटकों को खासा लुभाता है. जब इसका निर्माण हुआ था, तो स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला था और यहां पर्यटकों की संख्या भी बढ़ गई थी. सोशल मीडिया पर इस बंबू हाउस की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए और इसकी व्यापक चर्चा होने लगी.
महराजगंज: उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और हरियाली के लिए मशहूर है. जिले के बड़े हिस्से में फैला वन क्षेत्र इसे वन संपदा के लिहाज से समृद्ध बनाता है. यहां विभिन्न हिस्सों में अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जिनकी अपनी अलग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मान्यताएं हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख स्थल है रामग्राम, जिसे जिले के बड़े ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में गिना जाता है.
रामग्राम में बांस की लकड़ियों से बनाया गया एक बंबू हाउस पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा है. जंगलों के पास स्थित यह बंबू हाउस अपनी अनोखी डिजाइन, शांत वातावरण और प्राकृतिक हरियाली के कारण पर्यटकों को खासा लुभाता है. जब इसका निर्माण हुआ था, तो स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला था और यहां पर्यटकों की संख्या भी बढ़ गई थी. सोशल मीडिया पर इस बंबू हाउस की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए और इसकी व्यापक चर्चा होने लगी. लेकिन समय के साथ उपेक्षा और रखरखाव की कमी के कारण अब यह बंबू हाउस धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है.
रामग्राम का बंबू हाउस बन रहा गंदगी का अड्डा
शुरुआती दौर में यहां की साफ-सफाई और बंबू हाउस की मजबूत संरचना लोगों को सुकून देती थी. अब स्थिति यह है कि जैसे ही बंबू हाउस में प्रवेश किया जाता है. टूटे हुए टाइल्स वाली सीढ़ियां और चारों ओर गंदगी का अंबार नजर आता है. प्रवेश द्वार पर टाइल्स पर मोटी मिट्टी की परत जमी हुई दिखती है जो बेहद बदसूरत लगती है. ऐसी स्थिति प्रवेश करते ही देखने पर लोगों पर नकारात्मक असर पड़ता है.
लंबे समय से देखरेख और सफाई न होने की वजह से फर्श टूटने लगे है और उन पर कचरा बिखरा रहता है. मिट्टी जमा रहने के कारण लोहे के बेस वाली सीढ़ियां भी खराब होने की कगार पर है. यदि यह हालात ऐसे ही बने रहे, तो धीरे-धीरे लोहे में जंग लगने से सीढ़ियां भी टूट सकती हैं. बांस से बनी दीवारें और रेलिंग भी जगह-जगह से टूटने लगी है और समय पर मरम्मत न होने पर इनके अलग हो जाने का खतरा है. कभी बंबू हाउस के अंदर इतनी सफाई रहती थी कि लोग आराम से बैठकर समय बिताते थे, लेकिन अब यहां बैठना तो दूर, ज्यादा देर तक खड़े रहना भी लोगों को अच्छा नहीं लगता.
कमजोर होता जा रहा है रामग्राम का बंबू हाउस
गौर करने वाली बात यह है कि इसी तरह का एक और बंबू हाउस पास के जंगल में भी बनाया गया था. जिसका छत आंधी-तूफान के दौरान टूटकर गिर गया. यदि समय रहते रामग्राम के इस बंबू हाउस को मजबूत नहीं किया गया तो इसके साथ भी ऐसी ही स्थिति पैदा हो सकती है. इसके छत में लगी बांस की बल्लियां असंतुलित होने लगी है और अपनी मूल स्थिति से हटकर दूसरी दिशा में झुक रही है. जिससे इसकी मजबूती पर असर पड़ रहा है.
खासकर चारों तरफ बनी रेलिंग काफी कमजोर हो चुकी है. फर्स्ट फ्लोर पर लगी बांस की कई बल्लियां टूट चुकी है. जिनके बीच कचरा भर गया है. इसके अलावा कुछ लोग पान मसाला खाकर पैकेट वहीं फेंक देते हैं, जो बांस की बल्लियों के नीचे साफ दिखाई देते है और माहौल को और गंदा बना देते है. बंबू हाउस के प्रति यह उदासीनता पर्यटन के नजरिए से बिल्कुल भी ठीक नहीं मानी जा रही. पहले जैसा आकर्षण अब यहां नहीं रह गया है, क्योंकि टूटी रेलिंग, गंदगी और अव्यवस्था के चलते पर्यटक धीरे-धीरे इस जगह से दूरी बनाने लगे है.