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न झपट्टा मारा न दिखाईं आंखें… एक खौफ ने मिटाई शेरनी-कुत्ते की...


गुजरात के अमरेली जिले के खंभालीया गांव में सोमवार सुबह कुदरत का एक ऐसा अजूबा देखने को मिला जिसने इंसान ही नहीं बल्कि वन्यजीव विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया. अमूमन जंगल का नियम है कि ताकतवर कमजोर का शिकार करता है लेकिन जब दोनों की जान पर बन आए तो सारे नियम धरे के धरे रह जाते हैं. यहां एक खुले कुएं में शिकार का पीछा करते हुए एक शेरनी और अपनी जान बचाकर भाग रहा कुत्ता दोनों एक साथ गिर गए. बंद और संकरे कुएं में मौत के इसी खौफ ने दोनों के बीच के शिकारी और शिकार के रिश्ते को पूरी तरह मिटा दिया. लगभग 5 घंटे तक दोनों एक ही जगह बिना एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाए शांत बैठे रहे, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया.

कुएं में फंसी शेरनी और कुत्‍ता 5 मुख्य बातें

• शिकार के दौरान हादसा: खंभालीया गांव के पूर्व सरपंच अताभाई वाघ के खेत में एक शेरनी शिकार की तलाश में घूम रही थी. उसने एक बाग में कुत्ते को देखा और उसका पीछा करना शुरू किया. इसी आपाधापी में दोनों का पैर फिसल गया और वे एक गहरे खुले कुएं में जा गिरे.

• खत्म हुई भूख, जागा खौफ: कुएं में गिरने के बाद शेरनी ने कुत्ते पर हमला करने की एक भी कोशिश नहीं की. मौत के डर और सदमे के कारण शेरनी अपनी भूख भूल गई, वहीं कुत्ता भी अपनी नियति को स्वीकार कर शेरनी के ठीक पीछे चुपचाप बैठ गया.

• 5 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन: खेत मालिक की सूचना पर राजुला रेंज के वन अधिकारी डी. के. मकवाना के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. बेहद सावधानी से चलाए गए 5 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पहले शेरनी को और फिर कुत्ते को सुरक्षित बाहर निकाला गया.

• शेरनी को भेजा गया केयर सेंटर: कुएं से बाहर निकालने के बाद शेरनी को पिंजरे में कैद कर लिया गया. गिरने के कारण उसे कोई अंदरूनी चोट तो नहीं आई, इसकी जांच के लिए उसे तुरंत बाबरकोट एनिमल केयर सेंटर भेजा गया, जहां पशु चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे हैं.

• खुले कुओं का पुराना खतरा: इस घटना ने एक बार फिर गिर के वन्यजीवों के लिए खुले और बिना मुंडेर के कुओं से पैदा होने वाले खतरों को उजागर कर दिया है. स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार से इन खुले कुओं को तुरंत बंद करने या सुरक्षित करने की मांग की है.

वन्यजीवों के व्यवहार और इंसानी दखल
1. संकट में समान व्यवहार: जीव विज्ञान के अनुसार, जब किसी हिंसक जानवर को अचानक किसी अनजान या बंद जगह में कैद कर दिया जाता है तो उसका शिकार करने का प्राकृतिक इंस्टिंक्ट’ तुरंत आत्मरक्षा के मोड में बदल जाता है. शेरनी के लिए वह गहरा कुएं का माहौल इतना डरावना था कि उसका ध्यान कुत्ते से हटकर अपनी जान बचाने पर केंद्रित हो गया.

2. खुले कुएं वन्यजीवों के लिए काल: गिर के जंगलों से सटे ग्रामीण इलाकों में खुले कुएं एशियाटिक शेरों के लिए लंबे समय से मौत का कुआं साबित हो रहे हैं. शिकार का पीछा करते समय या रात के अंधेरे में ये जानवर अक्सर इन कुओं को देख नहीं पाते. यह घटना चेतावनी है कि अगर समय रहते इन कुओं पर मुंडेर या जाली नहीं लगाई गई तो भविष्य में शेरों की आबादी को बड़ा नुकसान हो सकता है.

सवाल-जवाब
कुएं के अंदर शेरनी ने कुत्ते पर हमला क्यों नहीं किया, जबकि वह उसका शिकार करने ही दौड़ी थी?
वन अधिकारियों के अनुसार, कुएं में गिरने के बाद शेरनी गहरे सदमे (Shock) और डर में थी. अचानक एक संकरी और अनजान जगह पर फंस जाने के कारण उसका पूरा ध्यान अपनी सुरक्षा पर चला गया, जिससे उसकी भूख और शिकार करने की इच्छा पूरी तरह दब गई.
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पहले किसे बाहर निकाला गया और दोनों की शारीरिक स्थिति कैसी है?
वन विभाग की टीम ने 5 घंटे की मशक्कत के बाद पहले शेरनी को सुरक्षित पिंजरे के जरिए बाहर निकाला और उसके ठीक बाद कुत्ते को रेस्क्यू किया गया. राहत की बात यह है कि इस पूरे हादसे में दोनों में से किसी भी जानवर को कोई गंभीर चोट नहीं आई है.
रेस्क्यू के बाद शेरनी को सीधे जंगल में क्यों नहीं छोड़ा गया और उसे कहां ले जाया गया है?
शेरनी इतनी ऊंचाई से कुएं में गिरी थी, इसलिए एहतियात के तौर पर उसकी मेडिकल जांच करना बेहद जरूरी था. उसकी शारीरिक स्थिति और किसी भी तरह की अंदरूनी चोट का पता लगाने के लिए उसे बाबरकोट एनिमल Care सेंटर शिफ्ट किया गया है, जहां डॉक्टर उसकी सेहत पर नजर रख रहे हैं.



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