भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

42 राफेल का ऑर्डर, मगर भारी पड़ी डील, फिर डबल कर दी...


दुनिया के लड़ाकू विमान बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. एक तरफ फ्रांस का राफेल है, जिसे दुनिया के सबसे आधुनिक 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट्स में गिना जाता है. दूसरी तरफ चीन का J-10C है, जिसने हाल के वर्षों में तेजी से अपनी पहचान बनाई है. अब दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े देशों में से एक इंडोनेशिया ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींच लिया है. फ्रांस से 42 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा करने वाला इंडोनेशिया अब चीनी J-10C पर ज्यादा भरोसा दिखाता नजर आ रहा है.

रिपोर्टों के मुताबिक इंडोनेशिया ने J-10C फाइटर जेट्स के अपने ऑर्डर को दोगुना करने का फैसला किया है. यह फैसला देश के व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है.

42 राफेल का सौदा

डिफेंस न्यूज से जुड़ी वेबसाइट militarywatchmagazine.com के मुताबिक इंडोनेशिया ने 2022 में फ्रांस के साथ 42 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा किया था. यह डील अरबों डॉलर की थी और इसे इंडोनेशियाई वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना गया था. लेकिन, अब संकेत मिल रहे हैं कि जकार्ता फिलहाल राफेल बेड़े को और आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है. इसके बजाय उसका झुकाव चीनी J-10C की तरफ बढ़ता दिख रहा है. रक्षा मामलों पर नजर रखने वाले कई विश्लेषकों का मानना है कि इंडोनेशिया लागत, क्षमता और भविष्य के अपग्रेड विकल्पों को ध्यान में रखकर यह रणनीति अपना रहा है.

आखिर क्यों बढ़ा J-10C पर भरोसा?

इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्याफ्री स्यामसोद्दीन ने पहले ही J-10C खरीद की पुष्टि कर दी थी. अब स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ऑर्डर की संख्या बढ़ाई जा रही है. J-10C को चीन का एडवांस्ड 4+ जनरेशन फाइटर माना जाता है. इसमें AESA रडार, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और लंबी दूरी की PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल जैसी क्षमताएं मौजूद हैं. चीन का दावा है कि यह विमान पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के खिलाफ भी प्रभावी ढंग से लड़ सकता है.

भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद बढ़ी चर्चा

J-10C की चर्चा मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के बाद और तेज हुई थी. कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि पाकिस्तान वायुसेना के J-10C विमानों ने भारतीय वायुसेना के राफेल विमानों के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन किया. हालांकि इन दावों को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी व्याख्याएं हैं, लेकिन इतना जरूर है कि इस संघर्ष के बाद J-10C वैश्विक सुर्खियों में आ गया. इसी वजह से कई देशों ने इस विमान को नए नजरिए से देखना शुरू किया.

चीन की बढ़ती ताकत का असर

पिछले एक दशक में चीन की लड़ाकू विमान तकनीक ने लंबी छलांग लगाई है. 2017 में चीन ने अपने पांचवीं पीढ़ी के J-20 स्टील्थ फाइटर को सेवा में शामिल किया. इसके बाद दिसंबर 2024 में उसने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के प्रोटोटाइप भी दुनिया के सामने पेश कर दिए. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब लड़ाकू विमान तकनीक के क्षेत्र में केवल रूस का विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि कई मामलों में पश्चिमी देशों को भी चुनौती दे रहा है. J-10C को भी इसी तकनीकी विकास का लाभ मिला है. इसमें J-20 कार्यक्रम से विकसित कई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है.

अमेरिकी प्रतिबंधों का भी पड़ा असर

इंडोनेशिया पहले रूस के Su-35 लड़ाकू विमान खरीदना चाहता था. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे के कारण यह सौदा आगे नहीं बढ़ सका. इसके बाद जकार्ता ने अपनी रक्षा खरीद नीति में बदलाव शुरू किया. देश ने ऐसे विकल्प तलाशने शुरू किए जो उसे किसी एक शक्ति केंद्र पर निर्भर न बनाएं. विश्लेषकों का मानना है कि J-10C इसी रणनीति का हिस्सा है.

दशकों तक सेवा में रहेगा J-10C

J-10C के मुख्य डिजाइनर ली जुन ने हाल ही में कहा था कि इस विमान में अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश है. उनके मुताबिक यह लड़ाकू विमान अगले 20 से 30 वर्षों तक प्रभावी बना रह सकता है. भविष्य में इसमें नई पीढ़ी के सेंसर, हथियार और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली भी जोड़ी जा सकती है. यही वजह है कि इंडोनेशिया इसे सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि लंबी अवधि के निवेश के रूप में देख रहा है. इंडोनेशिया का फैसला केवल एक खरीद सौदा नहीं है. यह वैश्विक हथियार बाजार में बदलते शक्ति संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है. 42 राफेल विमानों का सौदा बरकरार है. लेकिन उसके बाद अतिरिक्त खरीद की जगह J-10C पर बढ़ता भरोसा यह दिखाता है कि इंडोनेशिया अपनी वायुसेना के भविष्य को लेकर नई रणनीति पर काम कर रहा है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top