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राज्यसभा की दो सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर झारखंड में राजनीतिक तापमान चरम पर है। विधायकों को एकजुट रखने के लिए रिसॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। एकजुटता का दावा करने वाले एनडीए ने निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के समर्थन में अपने विधायकों को होटल रेडिशन ब्लू में शिफ्ट कर दिया है। इनके लिए होटल में 32 कमरे बुक कराए गए है। झारखंड में ऐसा पहली बार है, जब एनडीए के विधायकों को किसी होटल में शिफ्ट किया गया है। एनडीए ने सोमवार शाम को ही बैठक में तय कर दिया था कि सभी विधायक मंगलवार को होटल में शिफ्ट होंगे। मंगलवार सुबह 11 बजे से ही विधायक होटल पहुंचने लगे। सबसे पहले बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी होटल पहुंचे। इसके बाद देर शाम तक विधायकों का आना जारी रहा। भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने बताया कि एनडीए के 24 में से 23 विधायक होटल पहुंच चुके हैं। झरिया विधायक रागिनी सिंह के ससुर की सोमवार को पुण्यतिथि थी। वे इसमें बिजी थीं। इसलिए वह बुधवार सुबह होटल पहुंचेंगी। होटल में ही देर शाम सभी विधायकों ने बैठक की। उन्हें मॉक पोल भी कराया गया। अब 18 जून को सभी विधायक एक साथ यहां से सीधे विधानसभा पहुंचेंगे और वोट डालेंगे। होटल पहुंचे बाबूलाल मरांडी और एनडीए के विधायक कांग्रेस : 16 में 15 विधायक रांची पहुंचे कांग्रेस के 16 में से 15 विधायक होटल बीएनआर चाणक्य में जुटे। वहां पार्टी के प्रदेश प्रभारी के राजू, सह प्रभारी सिरी बेला प्रसाद, राष्ट्रीय महासचिव नासिर हुसैन, पर्यवेक्षक अजय शर्मा, भूपेंद्र मारावी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी मौजूद थे। इन्होंने पार्टी प्रत्याशी के साथ बैठक कर चुनाव की रणनीति तैयार की। इस दौरान मॉक पोल भी कराया गया। विधायक कुमार जयमंगल रांची से बाहर होने के कारण होटल नहीं पहुंच सके। इसके बाद सभी सीएम हाउस में गठबंधन दलों की बैठक में हिस्सा लिया। इससे पहले कांग्रेस प्रत्याशी पार्टी नेताओं के साथ प्रदेश राजद कार्यालय पहुंचे। राजद नेताओं के साथ करीब दो घंटे बातचीत की। झामुमो : सीएम हाउस में मॉक पोल, गठबंधन को 54 वोट, दो की सहमति महागठबंधन की शाम छह बजे सीएम आवास में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसके बाद मॉक पोल हुआ। इसमें गठबंधन के प्रत्याशियों को 56 में 54 वोट मिले। झामुमो विधायक व स्पीकर संवैधानिक कारणों से सीएम हाऊस नहीं पहुंचे। उन्होंने फोन पर अपनी सहमति दी। वहीं माले विधायक अरूप चटर्जी निजी कारणों से बैठक में नहीं आए। उन्होंने फोन से अपनी सहमति प्रदान की। इन सहमति के आधार पर मॉक पोल में झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम को 29 एवं कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 27 वोट मिले। मॉक पोल में कोई वोट रिजेक्ट नहीं हुआ। भाजपा कार्यालय में पर्याप्त जगह नहीं, इसलिए होटल में रखे गए विधायकों को ट्रेनिंग देनी है। भाजपा कार्यालय में इतनी जगह नहीं है, इसलिए सभी को ट्रेनिंग के लिए एक जगह रखा गया है। जब वे साथ रहेंगे तो प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के साथ ही सांगठनिक विषयों पर भी चर्चा होगी। बहुत सारे विषय हैं, जिनपर बात होनी है। -आदित्य साहू, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा पेंच सत्तारूढ़ गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पूरे 56 वोट हैं। एनडीए को अपनी सीट निकालने के लिए कम से कम 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। यही 4 वोटों की खाई ‘क्रॉस वोटिंग’ की आशंका को पैदा कर रही है। रास चुनाव का काला इतिहास: डर इस बार भी ऐसा ही साल 2010: हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप इस चुनाव में बड़े पैमाने पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोप लगे थे। एक निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की बातें सामने आईं। चुनाव आयोग को जांच के आदेश देने पड़े थे। साल 2012: नगद पकड़ाया, चुनाव रद्द वोटिंग के ही दिन गाड़ी से 2.15 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए थे। आरोप लगा था कि यह पैसा विधायकों को देने के लिए लाया गया था। चुनाव आयोग ने देश के इतिहास में पहली बार राज्यसभा चुनाव को रद्द कर दिया था। साल 2016: वोट आमान्य कराया भाजपा ने संख्या बल कम होने के बावजूद दो उम्मीदवार उतारे। कांग्रेस-विपक्ष के कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की या वोट अमान्य कराया। इससे विपक्ष के उम्मीदवार आरके आनंद चुनाव हार गए और भाजपा के महेश पोद्दार जीत गए। साल 2018: फरमान के खिलाफ वोट इस साल भी क्रास वोटिंग की कहानी दोहराई गई। प्रकाश झा और धीरज साहू के समीकरणों के बीच कुछ विधायकों ने अपनी ही पार्टी के व्हिप को दरकिनार कर पाला बदला, जिससे नतीजों ने सबको चौंका दिया था। साल 2026: सबसे बड़ा सवाल… इसबार क्या? सीधा वोट होगा या क्रॉस वोटिंग या कोई और खेल, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा। अमान्य वोट भी बड़ा खतरा: कैसे होता है खेल? ओपन बैलेट होने के बावजूद पाला बदलने के लिए ‘माननीय’ 4 तरीके अपनाते हैं 1. क्रॉस वोटिंग: पार्टी फरमान के खिलाफ विरोधी को वोट देना। 2. वोट दिखाने से इनकार: जानबूझ कर पार्टी एजेंट को बैलेट पेपर न दिखाकर वोट रद्द कराना। 3. जानबूझकर अमान्य करना: पेन या टिक मार्क लगाने में जानबूझकर गलती करना ताकि वोट काउंट न हो (2016 में यही हुआ था)। 4. अनुपस्थित रहना: वोटिंग के दिन सदन से गायब हो जाना, जिससे जीत का कोरम कम हो जाए। 3 कोणों में समझिए सीटों का समीकरण 1. झामुमो (बैजनाथ राम): झामुमो के पास अपने 34 विधायक हैं। जीत के लिए सिर्फ 28 वोटों की दरकार है, इसलिए बैजनाथ राम की संसद की राह पूरी तरह सुरक्षित है। 2. कांग्रेस (प्रणव झा): झामुमो के अतिरिक्त 6 वोट, कांग्रेस के अपने 16, राजद के 4 और माले के 2 वोट मिलकर कुल 28 होते हैं। यदि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट रहा, तभी कांग्रेस की नैया पार लगेगी। 3. निर्दलीय (परिमल नाथवानी): भाजपा के 21 और सहयोगियों के 3 वोटों को मिलाकर एनडीए के पास 24 का बल है। जादुई आंकड़े (28) तक पहुंचने के लिए इन्हें 4 बाहरी वोटों की जरूरत है। यानी, नाथवानी की जीत सिर्फ और सिर्फ क्रॉस वोटिंग पर टिकी है।
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