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पालतू कुत्ते के लिए खरीदी थी गाय, आज 90 लाख सालाना टर्नओवर...


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Palamu Dropout Engineer Turned Dairy Entrepreneur: पलामू के रवि भारती इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर नौकरी की तलाश कर रहे थे लेकिन पारिवारिक कारणों से उन्हें घर लौटना पड़ा. वापस आकर उन्होंने अपने पालतू कुत्ते के लिए एक गाय खरीदी क्योंकि वो बाजार का दूध नहीं पीता था. यहीं से उनके डेयरी उद्योग की शुरुआत हुई और आज सालाना 90 लाख का टर्नओवर है.

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पलामू. कहा जाता है कि अगर सोच नई हो और मेहनत सच्ची हो, तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता की कहानी बन सकती है. ऐसे ही पलामू जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत जोरकट गांव के रहने वाले रवि भारती ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में भटक रहे रवि ने एक ऐसी शुरुआत की, जिसने आज उन्हें डेयरी उद्योग के क्षेत्र में एक सफल उद्यमी बना दिया है. दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे व्यवसाय की नींव एक पालतू कुत्ते की जरूरत से पड़ी थी.

डॉग के लिए पाली गाय
रवि भारती ने लोकल18 को बताया कि वर्ष 2020 में आरजीपीवी विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे नौकरी की तलाश में थे, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें घर लौटना पड़ा. इस दौरान वे एक स्कूल में पढ़ाने लगे. उनके पास ‘सैम’ नाम का एक पालतू कुत्ता था, जो बाजार का दूध नहीं पीता था. उसकी जरूरत को देखते हुए रवि ने 18 हजार रुपये में एक गाय खरीदी. संयोग से वह गाय प्रतिदिन 17 से 18 लीटर दूध देने लगी. घर की जरूरत पूरी होने के बाद बचा हुआ दूध उन्होंने बेचना शुरू किया, जिससे अच्छी आय होने लगी.

चार गायों से बढ़ाया कारोबार
दूध की बढ़ती मांग को देखते हुए रवि ने धीरे-धीरे चार और गायें खरीदीं और व्यवसाय का विस्तार किया. इसी दौरान उनके मन में ग्रामीण क्षेत्रों से दूध संग्रह कर उसे वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित कर बाजार तक पहुंचाने का विचार आया. आगे उन्होंने ‘श्री अर्पण’ नाम से अपना डेयरी उद्यम शुरू किया. वर्तमान में वे लेस्लीगंज, रेड़मा, मेदिनीनगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से दूध संग्रह कर उसे चिलिंग एवं पैकेजिंग यूनिट के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं.

गुणवत्ता से नहीं करते समझौता
रवि ने आगे बताया कि उनके केंद्र में आने वाले प्रत्येक दूध की पहले सैंपलिंग की जाती है. इसके बाद केमिकल टेस्टिंग और मिल्क एनालाइजर के जरिए गुणवत्ता की जांच की जाती है. दूध में स्टार्च, डिटर्जेंट, यूरिया, फार्मलिन और सोडा जैसी मिलावटों की भी जांच होती है. सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही दूध को बल्क मिल्क कूलर में संग्रहित कर चिलिंग की प्रक्रिया से गुजारा जाता है. इसके बाद ताजा दूध बाजार में भेजा जाता है.

700 लीटर प्रतिदिन कारोबार, 20 लोगों को मिला रोजगार
आज रवि भारती हर दिन लगभग 700 लीटर से अधिक दूध का कारोबार कर रहे हैं. उनके पास 2500 लीटर क्षमता का अत्याधुनिक बल्क मिल्क कूलर उपलब्ध है. वर्तमान में उनका मासिक कारोबार 7 से 8 लाख रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि सालाना टर्नओवर 80 से 90 लाख रुपये के बीच है. इस उद्यम के माध्यम से लगभग 20 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है.

आगे पाश्चराइज्ड दूध उपलब्ध कराने की तैयारी
रवि ने आगे बताया कि अगला लक्ष्य दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करना है. वे भविष्य में पाश्चराइज्ड दूध बाजार में उतारना चाहते हैं. उनका कहना है कि ग्राहकों को हमेशा ताजा दूध उपलब्ध कराया जाएगा. सुबह का दूध उसी दिन शाम तक बाजार में पहुंचाया जाएगा और कई दिनों तक स्टोर किया हुआ दूध बेचने की उनकी कोई योजना नहीं है. वर्तमान में वे 60 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध, 1450 रुपये प्रति किलो की दर से देसी घी और 450 रुपये प्रति किलो की दर से पनीर बेच रहे हैं.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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