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भारत देश में लाखों की संख्या में मंदिर हैं और इनमें से बहुत मंदिर सालों पुराने हैं. कई मंदिर तो इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं और इनसे रोचक कहानियां भी जुड़ी हुई हैं. सभी मंदिरों की अलग कहानी है. आज हम आपको कोडरमा के एक सालों पुराने मंदिर के बारे में बातने जा रहे हैं. यह मंदिर झुमरी तिलैया के देवी मंडप रोड में स्थित है. यहां 100 वर्ष से अधिक पुराना शीतला माता मंदिर है. यहां देवी की प्रतिमा नहीं, बल्कि पिंड रूप में पूजा की जाती है. मंदिर में सात पिंड और भैरव जी का अलग स्थान है. पुजारी प्रमोद पाण्डेय के अनुसार मन्नत…..
कोडरमा: झुमरी तिलैया शहर के देवी मंडप रोड स्थित शीतला माता मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है. करीब 100 वर्षों से अधिक पुराने इस मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना स्वीकार होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. मंदिर के पुजारी प्रमोद पाण्डेय ने बताया कि इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां शीतला माता की पूजा प्रतिमा के रूप में नहीं, बल्कि पिंड रूप में की जाती है. मंदिर परिसर में कुल सात पिंड स्थापित हैं. जिनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है. इसके अलावा यहां भैरव जी का भी अलग पिंड स्थापित है. जिन्हें माता के रक्षक स्वरूप विशेष स्थान दिया गया है.
मन्नत पूरा होने पर चांदी की वस्तु अर्पित करते हैं श्रद्धालु
उन्होंने बताया कि शीतला माता की पूजा का संबंध शांति, शीतलता और सकारात्मक ऊर्जा से माना जाता है. श्रद्धालु विश्वास करते हैं कि माता की कृपा से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है. यही कारण है कि दूर-दूर से लोग यहां अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और माता के चरणों में शीश नवाते हैं. मंदिर में एक विशेष परंपरा भी प्रचलित है. जब किसी भक्त की मन्नत पूरी होती है तो वह माता को चांदी की वस्तुएं अर्पित करता है. इसके साथ ही विशेष पूजा-पाठ, आरती और भोग का आयोजन भी कराया जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ इसका पालन करते हैं.
त्योहार और विशेष अवसर पर बढ़ती है भीड़
पुजारी ने बताया कि मंदिर परिसर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक है. सुबह और शाम नियमित रूप से पूजा-अर्चना, आरती और भोग का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की भीड़ और अधिक बढ़ जाती है तथा पूरा परिसर भक्तिमय माहौल से गूंज उठता है.
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