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भारत अगले 1000 सालों का भविष्य लिख रहा है, दुनिया के लिए...


नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को रिपब्लिक शिखर सम्मेलन को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता है कि हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं हैं. उन्होंने कहा, “हम वो हैं, जिसने विकास और विनाश देखा भी है, झेला भी है. हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमोरी चिप लगी हुई है. इसलिए भारत जो कर रहा है, वह आने वाले 1,000 वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है, और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है.”

पीएम मोदी ने आगे ने कहा, “भारत न केवल एक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति भी है. तीव्र विकास के साथ-साथ, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की विश्वसनीयता भी लगातार बढ़ रही है. जी7 शिखर सम्मेलन से हाल ही में लौटने पर मैंने पाया कि विश्व भर के नेता और राष्ट्र इस बात को स्वीकार करते हैं और सराहते हैं कि ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ आज भारत का मार्गदर्शक सिद्धांत है.”

उन्होंने कहा कि भारत, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी है और एक विश्वसनीय अर्थव्यवस्था भी है और भारत की बढ़ती शक्ति के साथ विश्वसनीय शक्ति है. अभी मैं दो-तीन दिन पहले जी7 समिट से लौटा हूं, और दुनिया का हर नेता, हर देश इस बात को भलीभांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है. कुछ दिन पहले ही हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं. पिछले 12 वर्षों की जो भी उपलब्धियां देश की रही हैं, अगर आप तराजू से तौलोगे तो हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास, उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है. स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया, खादी और स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर, ये सारे इनिशिएटिव इसलिए सफल हुए, क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया. इसके लिए मैं देश के नागरिकों को सलाम करता हूं.

पीएम मोदी ने कहा कि सरकारी नीतियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ सिद्धांत का गहरा प्रभाव पड़ा है; इसका एक प्रमुख उदाहरण हमारे आदिवासी क्षेत्रों का परिवर्तन है. दशकों तक, ये क्षेत्र माओवादी आतंकवाद से त्रस्त रहे, जिसके कारण 21वीं सदी के अंत तक बुनियादी सरकारी सुविधाओं की आपूर्ति बाधित रही. कई सरकारें और पीढ़ियां बीतती गईं, फिर भी स्थानीय आबादी के लिए आशा अधूरी ही रही. 2004 से 2014 के बीच, माओवादी आतंकवाद के कारण 17,000 से अधिक हिंसक घटनाएं हुईं, जिनमें 7,000 से अधिक लोगों की जान गई. हालांकि, आज इन क्षेत्रों से माओवादी आतंकवाद का पूर्णतः उन्मूलन हो चुका है, यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जिसे कम नहीं आंका जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भी आतंकियों ने आदिवासी इलाकों में एक भी सुविधा नहीं पहुंचे दी. एक सरकारी गाड़ी नहीं गुजर सकती थी. गोलियों से भून दिया जाता था. अनेक सरकारें आईं गईं. कई पीढ़ियां आई गईं. लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसा ही रहेगा. मैं 100 से अधिक जिलों और 500 से अधिक ब्लॉकों पर चर्चा करना चाहूंगा, जो वर्षों से विकास के हर पैमाने पर पिछड़े रहे हैं. पिछली सरकारों ने इन क्षेत्रों को पिछड़ा क्षेत्र घोषित किया था. हमने इन क्षेत्रों को बदलने, उन्हें निराशा से बाहर निकालने और प्रगति की आकांक्षाओं को जगाने की चुनौती स्वीकार की. इस नए दृष्टिकोण को दर्शाते हुए, हमने इनका नाम बदलकर आकांक्षी जिले और ब्लॉक रख दिया. आज, ये आकांक्षी जिले और ब्लॉक राज्य के विकास को गति दे रहे हैं. इन क्षेत्रों की आबादी का एक बड़ा हिस्सा गरीबी में जीवन-यापन कर रहा था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, 25 करोड़ गरीब लोगों ने गरीबी से मुक्ति पाई है, जिसमें आकांक्षी जिलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र पहले नक्सलवाद से प्रभावित थे, आज वहां विकास की नई किरणें पहुंची हैं. आज साढ़े 9 हजार से अधिक मोबाइल टावर बनाए गए हैं. करीब 45 हजार गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंची है. नक्सल प्रभावित जिलों में करीब 75 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट और 6 हजार से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए. कतई नहीं हो सकता से ये होकर रहेगा. ये जो भाव आया है, यही भारत की असली सिद्धि है.

उन्होंने कहा कि 2014 में, लगभग 28 लाख लोग प्रतिदिन मेट्रो से यात्रा करते थे. आज यह संख्या बढ़कर लगभग 1.28 करोड़ दैनिक यात्रियों तक पहुंच गई है. इसके अलावा, नमो भारत, वंदे भारत और अमृत भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें अब देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ रही हैं. पिछले कुछ वर्षों में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे मध्यम वर्ग को हवाई यात्रा के अधिक अवसर मिल रहे हैं. भारत ने पिछले 12 वर्षों में निराशा को आशा में बदला है, और हमें इस बात का सबसे बड़ा संतोष है.

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होमलोन डबल डिजिट के रेट पर मिलता था, लेकिन आज किसी भी बैंक से होमलोन 7-8 प्रतिशत के रेट पर मिल जाता है. पहले लोन लेना यानी युद्ध जीतने जैसी ताकत लगती थी. आज घर बैठे संभव हो पा रहा है. गरीबी कम होना केवल कल्याण का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई आकांक्षाओं की प्रेरणा है. मध्यम वर्ग के जीवन को आसान बनाने के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है.



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