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इस साल बारिश की अवधि कम, हवा में कम दबाव से मानसून...




भास्कर न्यूज|लोहरदगा मानसून में हो रही देरी के बीच जिलेभर के किसान बारिश की आस में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। इस वर्ष मानसून अपने समय से काफी देर चल रही है, जिसके कारण किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। संपन्न किसान भाई तो वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बीड़ा लगा चुके हैं, परंतु बारिश की आस में रहने वाले किसान अब भी बीड़ा तैयार करने को लेकर बारिश की प्रतीक्षा में है। यदि गत वर्ष की ओर नजर डाली जाए तो अब तक किसान भाई रोपनी कार्य में जुट गए थे। परंतु इस वर्ष मानसून में हो रही देरी के कारण बीड़ा तैयार करने को लेकर भी किसान चिंतित है। कृषि विभाग के अनुसार जून माह में 137.4 एमएम बारिश का लक्ष्य रखा जाता है। इसके विपरीत अब तक मात्र 24 एमएम बारिश ही जिले में हुई है। जबकि गत वर्ष 2025 में जून माह में लक्ष्य के विपरीत 340 एमएम बारिश हुई थी। सिर्फ 20 जून 2025 तक 100 एमएम से अधिक बारिश हो चुकी थी। लगभग 10 से 11 जून 2025 तक मानसून जिले में पूरी तरह सक्रिय हो गया था। जबकि इस वर्ष मानसून जून माह के आखिरी समय तक भी सुस्त पड़ा है। वहीं अबतक मात्र 20 प्रतिशत किसान ही बीड़ा लगा सके है। वहीं अभी भी कई किसान खेतों को तैयार करने में जुटे है। विभाग के अनुसार आगे 2 जुलाई से मानसून सक्रिय होने की बात कही गई है। इधर रुक-रुक कर बारिश होने के कारण उमस भी बढ़ गई है। सुबह शाम मौसम कूल रह रहा है। वहीं दिन में लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश को लेकर खेती किसानी कार्य में जुटे किसान। बीते दिन बारिश से अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट आई थी, जिसके बाद शनिवार को पुनः जिले का अधिकतम तापमान 31 डिग्री दर्ज किया गया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ शंकर कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष मौसम विभाग के द्वारा बारिश की अवधि कम बताई गई है। मानसून के अबतक सक्रिय नहीं होने का कारण हवा में दबाव कम बनना है। केरल में मानसून समय से पहुंची थी परंतु हवा में कम दबाव बनने के कारण झारखंड पहुंचते पहुंचते मानसून सुस्त पड़ गई है। उन्होंने किसानों से बीड़ा लगाने में सप्ताह भर का अंतराल रखने की बात कही है, जिससे बीड़ा समय से तैयार हो सके। उन्होंने किसानों से अपील किया है कि अभी किसान कम पानी में होने उत्पादित होने वाले फसलों पर वैकल्पिक रूप से अधिक ध्यान दें, जिससे कम बारिश होने पर भी उन्हें अधिक नुकसान का सामना न करना पड़े।



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