अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के करीब पांच साल बाद भारत में पहली बार उसका ‘विक्ट्री डे’ रिसेप्शन कार्यक्रम किया गया. यह कार्यक्रम सोमवार को नई दिल्ली में हुआ. इसकी मेजबानी भारत में तालिबान के चार्ज डी’अफेयर्स नूर अहमद नूर ने किया.
इस कार्यक्रम में मुंबई में अफगानिस्तान के महावाणिज्यदूत डॉ. इकरामुद्दीन कामिल भी मौजूद थे. साथ ही विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान (PAI) डिवीजन के संयुक्त सचिव एम. आनंद प्रकाश भी मौजूद थे.
भारत-तालिबान में धीरे-धीरे बढ़ रही बातचीत
नूर अहमद नूर इसी साल जनवरी में नई दिल्ली पहुंचे थे. वह तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत में तैनात होने वाले पहले तालिबान नियुक्त अधिकारी हैं. भारत पहुंचने के बाद से उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं. इससे संकेत मिलता है कि भारत और तालिबान के बीच संपर्क धीरे-धीरे बढ़ रहा है. हालांकि, भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है.
तालिबान का दावा- ‘युद्ध का दौर पीछे छूटा’
‘विक्ट्री डे’ के मौके पर नूर अहमद नूर ने अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को लेकर कहा कि उनका देश अब युद्ध के लंबे दौर से आगे निकल गया है. अब देश स्थिरता, विकास और आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने 15 अगस्त को अफगानिस्तान के लिए अहम दिन बताया और दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में देश में सुरक्षा और स्थिरता मजबूत हुई है.
उनके मुताबिक, अब सरकार का ध्यान युद्ध के बजाय कानून-व्यवस्था, आर्थिक विकास, पुनर्निर्माण पर है. साथी ही लोगों बेहतर सार्वजनिक सेवाओं देने के प्रयास जारी है.
ऊर्जा से लेकर खेती तक निवेश पर जोर
नूर अहमद नूर ने कहा कि अफगानिस्तान ऊर्जा, खनन, कृषि और परिवहन जैसे क्षेत्रों में निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रहा है. उन्होंने टीएपीआई और कासा-1000 जैसी क्षेत्रीय परियोजनाओं को भी अफगानिस्तान की आर्थिक तरक्की के लिए अहम बताया.
तालिबान का कहना है कि अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति को दूसरे देशों के बीच संघर्ष का कारण नहीं बनाया जाना चाहिए. इसके बजाए व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग का माध्यम बनाया जाना चाहिए.
सभी देशों से रिश्ते मजबूत करने की बात
अफगान चार्ज डी’अफेयर्स ने कहा कि उनका देश सभी देशों के साथ आपसी सम्मान, बिना किसी के दखल और साझा हितों के आधार पर संबंध मजबूत करना चाहता है. उनके मुताबिक, अफगानिस्तान अब क्षेत्रीय देशों के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है.
भारत के साथ रिश्तों को बताया अहम
भारत के साथ संबंधों को लेकर नूर अहमद नूर ने कहा कि पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच संपर्क में काफी बढौतरी हुई है. उन्होंने राजनीतिक बातचीत, आर्थिक साझेदारी और लगातार संपर्क को भारत और अफगानिस्तान के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए जरूरी बताया.
उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और भारतीय नेतृत्व का अफगानिस्तान के अंतरराष्ट्रीय अधिकारों के समर्थन के लिए आभार भी जताया. नूर ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारत और अफगानिस्तान के बीच सहयोग और बढ़ेगा.
भारत के लिए क्यों अहम है यह कार्यक्रम?
नई दिल्ली में तालिबान का पहली बार ‘विक्ट्री डे’ रिसेप्शन आयोजित होना ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और तालिबान के बीच आधिकारिक संपर्क बढ़ रहा है. भारत के लिए अफगानिस्तान सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है. वहीं तालिबान के लिए भारत जैसे बड़े क्षेत्रीय देश के साथ संवाद बनाए रखना आर्थिक और कूटनीतिक रूप से अहम है.