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कई जगहों पर आज भी पुरानी मान्यताओं और परंपराओं की बड़ी मान्यता है. इनका अपना महत्व है. रक्षा बंधन में जहां बहन-बेटियां अपने मायके आती हैं तो उनके आने की खुशी में उनके घूमने फिरने के लिए मेला लगता है. झारखंड के पलामू में यहा मेला की परंपरा दशकों पुरानी है. यहां मेले में एंट्री फ्री है.
पलामू: सावन का पावन महीना आते ही घर-आंगन में त्योहारों की रौनक बढ़ जाती है. रक्षा बंधन के मौके पर घर की बहन-बेटियां अपने मायके लौटती हैं. ऐसे में परिवार के साथ घूमने-फिरने और मेले का आनंद लेने की परंपरा भी खास हो जाती है. इसे लेकर मेदिनीनगर में पुरानी परंपरा को एक बार फिर जीवंत करते हुए दशकों पुराना झूलन मेला शुरू किया गया है. मेला कोयल नदी किनारे अग्रसेन भवन के बगल में लगाया गया है, जहां बच्चों से लेकर बड़ों तक के मनोरंजन के लिए कई तरह के झूले और दुकानें सजाई गई हैं.
स्थानीय लोगों ने बताया कि पलामू में झूलन मेला की परंपरा कई दशकों पुरानी है. पिंटू चौरसिया ने बताया कि पुराने समय में यह मेला शिवाला घाट से लेकर नदी किनारे सड़क तक लगता था. समय के साथ मेला धीरे-धीरे सिमटता गया. पिछले वर्ष मेला आयोजित नहीं हुआ था, लेकिन इस बार फिर से इसे शुरू किया गया है. जहां की मनोरंजन के कई साधन लाए गए हैं.
ज्वाला विश्वकर्मा ने भी बताया कि पहले शिवाला घाट तक मेले की रौनक रहती थी. इस बार मेले में बच्चों के लिए मिक्की माउस, बोलेरो झूला, जंपिंग और ड्रैगन ट्रेन जैसे आकर्षण हैं. वहीं बड़ों के लिए ब्रेक डांस, चरखा, नाव झूला और टोरा-टोरा जैसे झूले लगाए गए हैं. खास बात यह है कि मेले में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है. महज 50 रुपये में लोग झूलों का आनंद ले सकेंगे.
आगे कब की मेले में करीब 30 से 40 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां खाने-पीने के सामान से लेकर जरूरत और घरेलू उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध होंगी. दुकानों पर सामान कम कीमत पर उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है, ताकि आम लोग भी परिवार के साथ मेले का भरपूर आनंद उठा सकें. इसके साथ साथ मेले में सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया है.
उन्होंने कहा कि झूलन मेला सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहेगा. सावन और रक्षा बंधन के अवसर पर मायके आने वाली बहन-बेटियों और परिवार के लोगों के लिए यह मेला मनोरंजन का अच्छा माध्यम बन रहा है. वर्षों पुरानी मेले की परंपरा के फिर से शुरू होने से स्थानीय लोगों में भी उत्साह है.
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