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ईरान के राष्ट्रपति डॉ मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और वहां के हालातों की पूरी जानकारी दी. इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने ईरान-अमेरिका पीस टॉक का समर्थन जाहिर करते हुए होर्मुज पर भी स्टैंड साफ कर दिया है. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में शांति बनाए रखने और व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए होर्मुज जलडमरू (Strait of Hormuz) के रास्ते जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए.
पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच फोन पर हुई बात
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में इस वक्त भले ही शांति की बड़ी-बड़ी बातें हो रही हों, लेकिन असलियत में शांति अभी कोसों दूर है. इस बीच, दुनिया की बड़ी ताकतें लगातार भारत से संपर्क साध रही हैं. इसी सिलसिले में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी को फोन मिलाया. दोनों नेताओं के बीच फोन पर काफी लंबी और बेहद जरूरी बातचीत हुई है. ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को पश्चिम एशिया के ताजा हालातों, वहां चल रही उठापटक और अपनी आगे की रणनीति के बारे में सब कुछ खुलकर बताया. इस दौरान पीएम मोदी ने भी बेहद सधे और मजबूत शब्दों में भारत का स्टैंड साफ कर दिया, जो न सिर्फ भारतीय तेल सप्लाई के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत मायने रखता है.
ईरानी राष्ट्रपति ने खुद फोन कर पीएम मोदी को दी पूरी जानकारी
दरअसल, पश्चिम एशिया में इस समय हालात पल-पल बदल रहे हैं. कूटनीतिक गलियारों से लेकर युद्ध के मैदान तक हर जगह जबरदस्त खींचतान मची हुई है. ऐसे समय में ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन मिलाया. उन्होंने पीएम मोदी को विस्तार से बताया कि क्षेत्र में इस वक्त क्या चल रहा है, अलग-अलग देशों के बीच बातचीत का क्या स्तर है और ईरान आगे क्या कदम उठाने की सोच रहा है?
पीएम मोदी ने बताया फोन पर हुईं क्या बात!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान और अन्य पक्षों के बीच बातचीत में हुई प्रगति और समझौतों का स्वागत किया. पीएम मोदी ने ट्वीट करके भी इस बातचीत की पुष्टि की. उन्होंने लिखा कि ‘पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान से बातचीत की. बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार प्रयासों से क्षेत्र में स्थायी शांति आएगी. भारत और दुनिया के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही की आजादी के महत्व को फिर से दोहराया’.
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी देशों को मिलकर और लगातार प्रयास करने होंगे. अगर ये इलाका अशांत रहता है तो इसका सीधा असर न केवल वहां रहने वाले लोगों पर पड़ेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. भारत लगातार इस बात की वकालत करता रहा है कि युद्ध विराम की तरफ बढ़ने और बातचीत की मेज पर आने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है.
होर्मुज पर भारत की बात क्यों है जरूर?
इस पूरी बातचीत का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था समुद्री रास्तों की सुरक्षा का मुद्दा. पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की आजादी और व्यापार की सुरक्षा भारत और पूरी दुनिया के लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है. ये बातचीत उन रिपोर्ट्स के बीच हुई है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि ईरान-ओमान मिलकर होर्मुज पर किसी तरह के टैक्स की व्यवस्था बना रहे हैं.
बता दें कि पूरी दुनिया में जितना भी कच्चा तेल समुद्र के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह जाता है, उसका करीब 20% से 30% हिस्सा इसी अकेले रास्ते से होकर गुजरता है. भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रूट के जरिए मंगाता है. अगर इस रास्ते पर तनाव जारी रहता है या ईरान कोई टैक्स वसूलना शुरू कर देता है तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगेंगे और दुनिया में भयंकर महंगाई आ जाएगी.
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If world leaders are arguing, borders are shifting, or a geopolitical storm is brewing somewhere on the planet, chances are Utkarsha Srivastava is already reading and writing about it.
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