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Low Rainfall Strategy: पलामू में किसानों के लिए इस बार मौसम सबसे बड़ी चुनौती हो सकता है. जून में जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उसकी आधी भी नहीं हुई. इस बारे में जब कृषि विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शाह से बात की गई तो उन्होंने कुछ तरीके और टिप्स दिए जिससे कम पानी में भी सफल खेती की जा सके, खासकर नुकसान की संभावना से बचा जा सके.
पलामू. मानसून की बारिश आने के बाद पलामू के किसानों के लिए राहत की खबर है. अब किसान अपनी खेती के पहले चरण को आसानी से शुरू कर सकते हैं. हालांकि इस खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही पलामू के किसानों के सामने इस बार मौसम सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. इस बार सुपर अल नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. ऐसे में किसानों को खेती करने के लिए खास तौर पर तैयारी करने की जरूरत है.
खेती की रणनीति बदलने की जरूरत
दरअसल, जून महीने में पलामू में औसतन 157 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल लगभग 60 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है. ऐसे में धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय किसानों को समय रहते खेती की रणनीति बदलने की जरूरत है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी अच्छी उपज और बेहतर आमदनी सुनिश्चित की जा सके, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिल सके.
टांड़ जमीन में अरहर और मक्का की खेती होगी बेहतर विकल्प
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शाह ने बताया कि जिन किसानों के पास टांड़ या ऊंची जमीन है, वे खेत की जुताई कर तुरंत अरहर या मक्का की बुआई शुरू कर दें. ये दोनों फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं और सूखे की स्थिति को बेहतर तरीके से सहन कर सकती हैं. जुलाई के शुरुआती सप्ताह तक अरहर की बुआई का उपयुक्त समय माना जाता है.
रिज एंड फरो पद्धति फायदेमंद
कम और अनिश्चित बारिश को देखते हुए किसानों को रिज एंड फरो (मेढ़ और नाली) पद्धति अपनाने की सलाह दी जा रही है. इस तकनीक में ऊंची मेढ़ बनाकर फसल लगाई जाती है और बीच में नाली छोड़ी जाती है. अगर अधिक बारिश हो जाए तो अतिरिक्त पानी नाली से निकल जाता है, वहीं कम बारिश होने पर नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इससे फसल के खराब होने की संभावना काफी कम हो जाती है.
धान के साथ अरहर भी लाभदायक
उन्होंने कहा कि किसान धान की दो क्यारियों के बीच अरहर की बुआई भी कर सकते हैं. इस अंतरवर्ती खेती से एक ही खेत में दो फसलों का उत्पादन मिलेगा. अगर धान पर मौसम का असर पड़ता है, तब भी अरहर किसानों की आय का सहारा बन सकती है. यह तरीका जोखिम कम करने के साथ खेत की उत्पादकता भी बढ़ाता है.
धान के बिचड़े के लिए सही समय
वे आगे कहते हैं कि बारिश भले सामान्य से कम हुई हो, लेकिन उपलब्ध नमी धान का बिचड़ा तैयार करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है. किसान अभी नर्सरी तैयार कर सकते हैं, ताकि आने वाले दिनों में अगर अच्छी बारिश होती है तो समय पर रोपाई की जा सकेगी. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम को देखते हुए फसल चयन और आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाकर किसान नुकसान की आशंका को काफी हद तक कम कर सकते हैं.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें