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F-404 तेजस इंजन को तरस रहा भारत, उधर डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान...


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Tejas F-404 Engine Story: मौजूदा वक्त में भारत का पूरा फाइटर जेट प्रोग्राम अमेरिकी रहमों करम पर निर्भर है. भारत इस वक्त तेजस मार्क-1ए, तेजस मार्क-2 और एम्का फाइटर जेट पर काम कर रहा है. लेकिन, इन सभी फाइटर जेट्स का दिल अमेरिका के पास है. दरअसल, ये सभी जेट अमेरिकी कंपनी जीई के इंजन पर निर्भर हैं. भारत अभी तक पुख्ता तौर पर अपना इंजन नहीं बना पाया है. लेकिन, अमेरिका भारत के फाइटर जेट प्रोग्राम में इंजन की सप्लाई में अड़चने पैदा कर बाधा पैदा कर रहा है. इस बीच वह भारत के दुश्मन और पाकिस्तान के यार यानी तुर्की के साथ एक बड़ा अहम इंजन डील करने जा रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भारत को इंजन के लिए तरसा कर डोनाल्ड ट्रंप ऐसा क्यों कर रहे हैं.

F-404 इंजन को तरस रहा भारत, उधर ट्रंप ने पाक के यार को थमाया F110, US का धोखा!Zoom

तुर्की पांचवीं पीढ़ी का अपना कान फाइटर जेट बना रहा है जिसमें एफ110 जेट लगाया गया है.

Tejas F-404 Engine Story: भारत लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा है. यह बात सबको पता है. भारत अपना स्वदेसी फाइटर जेट प्रोग्राम भी चला रहा है. लेकिन, यह पूरा प्रोग्राम अमेरिकी रहमों-करम पर निर्भर है. भारत इस वक्त तेजस श्रेणी के दो विमानों तेजस-एमके-1ए और तेजस-मार्क-2 पर काम कर रहा है. तेजस-एमके1ए का प्रोडक्शन शुरू हो चुका है. इंडियन एयरफोर्स ने 180 जेट का ऑर्डर भी दे दिया है. लेकिन, वह करीब दो साल से डिलिवरी का इंतजार कर रही है. दरअसल, इन विमानों में अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स यानी जीई कंपनी के इंजन एफ-404 लगाए जाने हैं. लेकिन, यह कंपनी बार-बार धोखे पर धोखा दे रही है. वह समय पर इंजन की डिलिवरी नहीं कर रही है.

इसी तरह भारत के तेजस मार्क-2 विमानों में जीई के कंपनी के एफ-414 इंजन लगाए जाने हैं लेकिन, ऐन मौके पर अमेरिका ने इस इंजन का रेट करीब तीन गुना बढ़ा दिया है. इस कारण इंजन डील अटक गई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उसने एक इंजन के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की डिमांड की है. इसी एफ-414 इंजन पर भारत का एम्का प्रोग्राम भी निर्भर है. एम्का के शुरुआती जेट्स में एफ-414 इंजन ही लगाए जाने हैं.

पाकिस्तान के जिगरी यार की मदद

अमेरिका यहीं नहीं रुक रहा. उसने भारत को इंजन के लिए तरसाने के साथ पाकिस्तान के जिगरी यार की मदद भी करने लगा है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बड़ा नीतिगत फैसला लेने जा रहे हैं. वह नाटो के शिखर सम्मेलन में तुर्की को एफ-110 जेट इंजन देने को मंजूरी दे सकते हैं. तकनीकी रूप से देखें तो यह एक बेहद अहम फैसला है. एफ-110 एक बेहद ताकतवर और एडवांस जेट इंजन है. यह करीब 145 किलो न्यूटन का थ्रस्ट जेनरेट करता है जबकि एफ-404 करीब 80 किलो न्यूटन और एफ-414 करीब 98 किलो न्यूटन का थ्रस्ट जेनरेट करता है. यानी एफ-110 बहुत ताकतवर जेट है. तुर्की इसका इस्तेमाल अपनी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट कान (KAAN) में करेगा. हालांकि अमेरिका ने तुर्की को अपना पांचवीं पीढ़ी का एफ-35 जेट फिलहाल देने से मना कर दिया है.

भारत जीई से दो इंजन एफ404 और एफ414 खरीद रहा है. फोटो- रायटर

तुर्की एक प्रभावी इस्लामिक मुल्क है. वह नाटो का सदस्य है और पाकिस्तान का जिगरी यार है. बीते साल ऑफरेशन सिंदूर के दौरान उसने खुलेआम पाकिस्तान का साइड लिया था और उसे बड़ी संख्या में ड्रोन्स की सप्लाई की थी. पाकिस्तान ने उन्हीं ड्रोन्स का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया था. हालांकि भारत के कई लेयर वाले तगड़े डिफेंस सिस्टम ने उसके सभी ड्रोन्स को समय रहते हवा में ही मार दिया था. इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र सहित तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान भारत के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं.

नाटो की बैठक सात और आठ जुलाई को होने वाली है. इसमें 32 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप और तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के बीच रक्षा सहयोग के लिए अहम मीटिंग होगी. पिछले महीने ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह तुर्की को खुश करने के लिए कुछ बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं.

कितना अहम है एफ-110 डील

बीते कुछ वर्षों में तुर्की ने अपनी पहचान एक ग्लोबल हथियार निर्माता देश के रूप में स्थापित की है. उसकी कंपनी तुर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज पांचवीं पीढ़ी का कान फाइटर जेट बना रहा है. यह एक स्टील्थ फाइटर जेट है. ये जेट तुर्की के सैन्य बेड़े में मौजूद पुराने पड़ चुके एफ-16 की जगह लेंगे और वह दुनिया के अन्य देशों को भी इसे बेच सकेगा. प्रोटोटाइप कान जेट अभी एफ-110 इंजन पर ही उड़ रहे हैं. लेकिन, बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने के लिए तुर्की को अब बड़ी संख्या में एफ-110 जेट चाहिए. तुर्की शुरुआत में करीब 40 एफ-110 जेट इंजन लेना चाहता है. तुर्की लंबे समय से अमेरिका इंजन हासिल करने की कोशिश कर रहा था. उसे अब तक 10 इंजन मिले हैं. वह अमेरिका से करीब 80 इंजन चाहता है.

जीई दुनिया की एक सबसे बड़ी जेट इंजन निर्माता कंपनी है. फोटो- रायटर

रूस के कारण अमेरिका हुआ नाराज

अमेरिका नाराजगी के पीछे सबसे बड़ी वजह तुर्की के रूस से एस-400 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम खरीदना था. 2017 में तुर्की ने रूस से ये सिस्टम खरीदे थे. इसके बाद तुर्की और अमेरिका के रिश्तों में तनाव आ गया. फिर अमेरिका ने 2019 में तुर्की को एफ-35 फाइटर जेट प्रोग्राम से बाहर कर दिया. वर्ष 2020 में उसने तुर्की पर कास्टा (CAATSA) कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिए. इस कानून के तहत तुर्की को संवेदनशील रक्षा तकनीक देने पर बैन लगा दिया गया. तुर्की फिर से एफ-35 कार्यक्रम में शामिल होने की कोशिश कर है लेकिन अभी तक उसको सफलता नहीं मिली है.

एफ-35 नहीं मिलने के कारण तुर्की ने कान फाइटर जेट बनाने पर अपना फोकस केंद्रित कर दिया.
अब उसने इंजन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति को राजी कर एक बड़ी कूटनीति जीत हासिल की है. कान फाइटर जेट के साथ तुर्की का व्यापक हित जुड़ा हुआ है. वह इसे अन्य देशों को बेचना चाहता है. अभी इस जेट का परीक्षण उड़ान चल रहा है. इस बीच तुर्की ने इंडोनेशिया के साथ 48 कान फाइटर जेट का सौदा कर लिया है. यह सौदा करीब 10 अरब डॉलर का है. जानकारों का मानना है कि अमेरिका इंजन मिलने से इस जेट की विश्वसनीयता बढ़ेगी और स्पेन सहित अन्य देश इस जेट को खरीदने के इच्छुक बताए जा रहे हैं.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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