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गिरिडीह जिले के धनवार प्रखंड की उत्तरी डोरंडा पंचायत में जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। खोरीमहुआ-कोडरमा मुख्य मार्ग से गावां-पिहरा मार्ग को जोड़ने वाली इस सड़क की बदहाली से परेशान ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों और दलदली हिस्सों में धान की रोपाई की। ग्रामीणों का कहना था कि जब सड़क खेत जैसी बन गई है, तो धान रोपना ही अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाने का प्रभावी तरीका है। यह सड़क वर्षों से जर्जर अवस्था में है। जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बरसात का पानी जमा होने से पूरी सड़क दलदल में बदल जाती है। आवागमन जोखिम भरा इससे पैदल चलना मुश्किल हो जाता है और दोपहिया व चारपहिया वाहनों का आवागमन जोखिम भरा रहता है। कई बार लोग फिसलकर घायल हुए हैं और छोटे-बड़े हादसे भी हुए हैं, लेकिन सड़क निर्माण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। यह मार्ग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से स्कूल और कॉलेज जाते हैं। इसके अतिरिक्त, आसपास के गांवों के लोग अस्पताल, बाजार, साप्ताहिक हाट, बैंक, मंदिर, मस्जिद और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं। बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है खराब सड़क के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी परेशानी होती है। बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जिससे आवागमन लगभग बाधित हो जाता है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को सड़क निर्माण की मांग से कई बार अवगत कराया गया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला। इसी मजबूरी में उन्हें यह अनोखा विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाले किसी भी जन आंदोलन या सड़क जाम की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी। ग्रामीणों के इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की पूरे इलाके में चर्चा बनी हुई है।
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