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South India’s Taj Mahal: हैदराबाद के पास मछलीपट्टनम में स्थित सेंट मैरी चर्च को ‘दक्षिण भारत का ताजमहल’ कहा जाता है. यह चर्च 200 साल पहले एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जॉन पैटर और अराबेला रॉबिन्सन की अधूरी प्रेम कहानी का प्रतीक है. अराबेला की मौत के बाद जॉन ने उनके शरीर को मसालों से सुरक्षित कर एक कांच के ताबूत में रखा था, जो एक विशेष चाबी (लीवर) घुमाने पर जमीन से ऊपर आ जाता था. आज भी यह अनोखी कब्र लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है.
South India’s Taj Mahal: आमतौर पर जब भी दुनिया में मोहब्बत की किसी बेमिसाल मिसाल का जिक्र होता है, तो सबसे पहले आगरा के ताजमहल का नाम जेहन में आता है. लेकिन हैदराबाद से कुछ ही दूरी पर आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित मछलीपट्टनम शहर में एक ऐसा ऐतिहासिक चर्च मौजूद है, जिसे स्थानीय लोग बेहद सम्मान और प्यार से ‘साउथ इंडियन ताजमहल’ यानी दक्षिण भारत का ताजमहल कहते हैं. यह जगह है मछलीपट्टनम का ऐतिहासिक सेंट मैरी चर्च, जो आज से करीब दो सौ साल पुरानी एक अधूरी मगर बेहद गहरी प्रेम कहानी का गवाह बना हुआ है.
इस चर्च के भीतर कदम रखते ही एक बेहद खास और अनोखी कब्र दिखाई देती है, जो गुजरे जमाने की एक मुकम्मल मोहब्बत की दास्तां बयां करती है. यह कब्र अराबेला रॉबिन्सन नाम की एक ब्रिटिश महिला की है. इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि करीब साल 1800 के आस-पास अराबेला और एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जॉन पैटर के बीच गहरा प्रेम हो गया था. दोनों ने एक सैन्य समारोह में पहली बार एक-दूसरे को देखा था. हालांकि, अराबेला के पिता और तत्कालीन ईसाई पादरियों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था. सामाजिक बंधनों को तोड़कर अराबेला अपने माता-पिता का घर छोड़कर जॉन पैटर के साथ रहने लगीं. लेकिन शादी न हो पाने का मानसिक तनाव और ऊपर से मलेरिया की बीमारी के कारण महज 40 वर्ष की आयु में 6 नवंबर 1809 को अराबेला का निधन हो गया.
कांच का ताबूत और घूमती चाबी का रहस्य
अराबेला की मौत से जॉन पैटर पूरी तरह टूट गए थे. अपनी महबूबा के लिए जॉन का प्यार इतना असीम था कि वे उनके पार्थिव शरीर को खुद से दूर नहीं करना चाहते थे. उन्होंने अराबेला के शरीर को एक ममी की तरह सुगंधित द्रव्यों और मसालों की मदद से सुरक्षित किया और उसे कांच के एक विशेष ताबूत में रखवाया. तकनीकी रूप से इस कब्र को इस तरह तैयार किया गया था कि इसमें एक विशेष लॉकिंग सिस्टम और दीवार पर एक लीवर यानी घूमने वाली चाबी लगाई गई थी. जॉन पैटर जब भी अराबेला को देखना चाहते, वे उस लीवर को गोल घुमाते और ‘कट-कट’ की आवाज के साथ वह कांच का ताबूत जमीन से ऊपर आ जाता था. वे अपनी प्रियसी का चेहरा देखते, आंसू बहाते और फिर ताबूत को वापस नीचे कर देते.
आज भी जीवंत है इतिहास
शुरुआत में यह सिर्फ एक कब्र पर बना प्रार्थना कक्ष था, जिसे बाद में सेंट मैरी चर्च का रूप दे दिया गया. आज भी यह ऐतिहासिक इमारत प्रेम की उस अनोखी और दर्दभरी दास्तां को खुद में समेटे खड़ी है. इस अनोखे मैकेनिज्म और असीम प्रेम की वजह से ही इतिहास प्रेमी और सैलानी इस चर्च को देखने दूर-दूर से यहाँ आते हैं.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें