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धनबाद के ओमप्रकाश चौहान पिछले 703 दिनों से दिव्यांगजनों के अधिकारों की मांग को लेकर लोकभवन के समीप धरने पर डटे हैं। इंटर तक पढ़े ओमप्रकाश कभी प्रज्ञा केंद्र में ऑपरेटर थे। इस दौरान उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, पेंशन प्रावधानों और दिव्यांगजनों के अधिकारों की विस्तृत जानकारी मिली। यही अनुभव आगे चलकर उनके सामाजिक संघर्ष की नींव बना। योजनाओं की जानकारी होने से वे समझ सके कि कई लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसी जागरूकता ने उन्हें दिव्यांगजनों के अधिकारों की आवाज उठाने और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग करने के लिए प्रेरित किया। आज उनका आंदोलन केवल व्यक्तिगत मांग नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रतीक बन गया है। दिन में धरने पर बैठने वाले ओमप्रकाश शाम को फूड डिलीवरी का काम कर किसी तरह अपना और परिवार का खर्च चलाते हैं। धनबाद में पत्नी और दो छोटे बच्चों से दूर रहते हुए भी उन्हें विश्वास है कि उनकी आवाज एक दिन सरकार तक अवश्य पहुंचेगी।
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