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बोकारो में दहेज मुक्त शादी; बैलगाड़ी में निकाली बारात:सादगी-परंपरा को दी तरजीह,...




बोकारो जिले के कसमार प्रखंड में रविवार को निकली बारात इलाके में चर्चा की विषय बना हुआ है। यह बारात थी तेलियाडीह टांगटोना निवासी शिव महतो के बेटे जनार्दन कुमार महतो की। जिसकी शादी मुंगो बगदा निवासी नागेश्वर महतो की बेटी श्वेता कुमारी के साथ संपन्न हुआ। बिना दहेज लिए सादगी और परंपरागत तरीके से बैलगाड़ी में निकली बारात ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। फूलों से सजी बैलगाड़ी, उसके पीछे कुड़माली लोकधुनों पर झूमते बराती इलाके में चर्चा का विषय बन गए। खबर से जुड़ी तस्वीरें देखें… ग्रामीणों के सहयोग से सजी आकर्षक बैलगाड़ी इस अनोखे आयोजन को यादगार बनाने में ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंजूरा निवासी मिथिलेश महतो ने बैलगाड़ी का रंग-रोगन किया, जबकि डुमरकुदर निवासी भुवनेश्वर महतो और उनके सहयोगियों ने फूलों व पारंपरिक सामग्री से उसे बेहद आकर्षक ढंग से सजाया। सजी-धजी बैलगाड़ी पूरे समारोह का मुख्य आकर्षण बनी रही। जहां-जहां से बारात गुजरी, वहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना की। दूल्हा-दुल्हन ने कहा कि इस तरह के दहेज मुक्त और पारंपरिक विवाह समाज को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ हमारी लोक संस्कृति और विरासत को जीवंत बनाए रखने का काम करते हैं। कुड़माली परंपरा में रंगी बारात, पैदल पहुंचे बराती वर्षों बाद निकली बैलगाड़ी वाली बारात ने न केवल पुरखों की परंपरा को जीवंत किया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि विवाह एक संस्कार है, न कि सौदेबाजी का माध्यम। आज जब शादियों में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, ऐसे समय में इस आयोजन ने सादगी, संस्कृति और सामाजिक सोच की नई मिसाल पेश की। बारात पूरी तरह पारंपरिक रंग में रंगी नजर आई। बराती कुड़माली लोकधुनों और घोड़ा नाच के साथ झूमते-गाते पैदल ही बगदा गांव पहुंचे। पूरे रास्ते में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा।
इस दौरान स्थानीय लोग भी बारात में शामिल होकर इस अनूठी पहल का हिस्सा बने। बैलगाड़ी में सवार दूल्हे की सादगी और पारंपरिक अंदाज ने सभी का मन मोह लिया। पारंपरिक नेगचार से संपन्न हुई शादी तेलियाडीह टांगटोना के रहने वाले जनार्दन और मुंगो बगदा की रहने वाली श्वेता कुमारी की शादी हुई। विवाह की सभी रस्में कुड़माली समाज के पारंपरिक नेगचार के अनुसार पूरी की गईं। वर-वधू पक्ष ने साफ तौर पर यह संदेश दिया कि विवाह केवल एक पवित्र संस्कार है, न कि लेन-देन का जरिया। इस अनोखे विवाह ने समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया। वहीं सादगीपूर्ण विवाह की एक नई मिसाल कायम की।



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