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पत्थरों में छिपी है ‘पारिवारिक नोकझोंक’? राजस्थान के जवाई की ‘देवरानी-जेठानी’, क्या...


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Rajasthan Ajab Gajab Story : राजस्थान के पाली जिले का जवाई क्षेत्र सिर्फ लेपर्ड सफारी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां मौजूद ‘देवरानी-जेठानी’ नाम से मशहूर दो विशाल ग्रेनाइट चट्टानें अपनी अनूठी बनावट और स्थानीय लोककथाओं के कारण पर्यटकों का खास आकर्षण बनी हुई हैं. भूवैज्ञानिकों के अनुसार ये चट्टानें करीब 85 करोड़ वर्ष पुरानी हैं और प्राकृतिक क्षरण के कारण इनका आकार इंसानी आकृतियों जैसा दिखाई देता है. जवाई सफारी के दौरान यह स्थान सेल्फी और फोटोग्राफी का लोकप्रिय पॉइंट है. अक्सर यहां लेपर्ड भी चट्टानों पर आराम करते नजर आते हैं, जिससे यह जगह प्रकृति, वन्यजीव और स्थानीय संस्कृति का अनोखा संगम बन जाती है.

पाली. राजस्थान का जवाई क्षेत्र वैसे तो अपने तेंदुओं यानी लेपर्ड्स, ग्रेनाइट की पहाड़ियों और खूबसूरत वादियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. देश-विदेश से पर्यटक यहां ‘लेपर्ड सफारी’ का लुत्फ उठाने आते हैं. लेकिन आज हम आपको जवाई की वादियों में छिपे एक ऐसे अनोखे और दिलचस्प रहस्य से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिसे स्थानीय लोग ‘देवरानी-जेठानी’ कहते हैं. चौंकिए मत! ये कोई इंसान नहीं, बल्कि ग्रेनाइट की दो विशालकाय चट्टानें हैं, जिनकी नोकझोंक और स्वभाव की कहानियां सालों से इस इलाके में गूंज रही हैं.

जवाई के ऊबड़-खाबड़ और खूबसूरत रास्तों से गुजरते समय इन दो विशाल चट्टानों पर हर किसी की नजर ठहर जाती है. इन चट्टानों की सबसे खास बात इनका आकार और बनावट है. स्थानीय ग्रामीणों और सफारी गाइड्स के मुताबिक, ये दोनों चट्टानें इस तरह टिकी हुई हैं जैसे दो महिलाएं एक-दूसरे से नाराज होकर, मुंह फुलाए और पीठ फेरकर बैठी हों. भारतीय परिवारों में पारंपरिक रूप से देवरानी और जेठानी के बीच होने वाली हल्की-फुल्की नोकझोंक और रूठने-मनाने से जोड़कर ही सदियों पहले इसका नाम ‘देवरानी-जेठानी की चट्टानें’ रख दिया गया था.

लाखों साल पुराना है इतिहास
भले ही लोककथाओं में इसे देवरानी-जेठानी का नाम दिया गया हो, लेकिन भूवैज्ञानिक दृष्टि से यह प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार है. वैज्ञानिकों के अनुसार, जवाई की ये पहाड़ियां करीब 850 मिलियन (85 करोड़) साल पुरानी हैं, जो ‘इंटरूटिव ग्रेनाइट’ से बनी हैं. लाखों सालों तक हवा, तेज धूप और बारिश के कारण इन चट्टानों का प्राकृतिक रूप से क्षरण हुआ. हवा के थपेड़ों ने इन्हें तराश कर ऐसा रूप दे दिया कि आज ये इंसानी आकृतियों जैसी नजर आती हैं.

लेपर्ड्स का पसंदीदा ठिकाना
जवाई सफारी के दौरान यह पॉइंट पर्यटकों के लिए एक बड़ा ‘सेल्फी पॉइंट’ और आकर्षण का केंद्र बन चुका है. गाइड जब सैलानियों को जिप्सी रोककर इन पत्थरों के पीछे की कहानी सुनाते हैं, तो विदेशी पर्यटक भी भारतीय संस्कृति के इस अनोखे रंग को जानकर लोटपोट हो जाते हैं. सिर्फ पर्यटक ही नहीं, जवाई के लेपर्ड्स भी अक्सर इन गुफामा चट्टानों के ऊपर धूप सेकते या आराम करते नजर आ जाते हैं, जो वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स के लिए एक परफेक्ट शॉट होता है.

स्थानीय संस्कृति और किंवदंतियों का अटूट हिस्सा
जवाई का यह इलाका न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां की हर पहाड़ी और गुफा से कोई न कोई लोककथा जुड़ी हुई है. स्थानीय लोगों का मानना है कि ये चट्टानें हमें यह सीख भी देती हैं कि आपसी मनमुटाव चाहे जितना हो, संकट के समय दोनों हमेशा एक साथ खड़ी रहती हैं. यही वजह है कि सदियों से मौसम के हर थपेड़े को सहते हुए भी ‘देवरानी-जेठानी’ की यह जोड़ी जवाई के मुकुट पर शान से विराजमान है.

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Anand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें



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