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सीआईडी ने 24 जून को रिम्स में वर्ष 2025 में एमबीबीएस और बीडीएस में फर्जी प्रमाण पत्र मामले और टेंडर में हुई गड़बड़ी को लेकर छापेमारी की थी। अब इस मामले में सीआईडी ने रिम्स प्रबंधन से एमबीबीएस के तीन और बीडीएस के एक स्टूडेंट्स के संबंध में जवाब मांगा है। जिन स्टूडेंट्स के संबंध में सीआईडी की ओर से जवाब मांगा गया है उनमें 2025 में एमबीबीएस में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स काजल कुमारी, आशीष कुमार, पप्पू कुमार और बीडीएस में एडमिशन लेने वाली छात्रा ओली विश्वकर्मा शामिल है। इन छात्रों के जाति व विकलांगता प्रमाण पत्र जांच के लिए संबंधित जिलों को भेजे गए हैं। सफाई व्यवस्था के टेंडर मामले में भी मांगा जवाब सीआईडी ने रिम्स प्रबंधन से मुख्य अस्पताल भवन, सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक, हॉस्टल व ट्रामा सेंटर में सैनिटेशन, हाउसकीपिंग और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए हुए टेंडर से जुड़े सभी कागजात व प्रक्रिया के संबंध में भी जानकारी मांगी है। क्योंकि इस मामले में यह आरोप लगा है कि वर्ष 2025 में हुए टेंडर मामले में तकनीकी व वित्तीय रूप से अयोग्य होने के बाद भी उत्तर प्रदेश की तीन कंपनियों को पात्र घोषित किया गया। जिस समय यह टेंडर हुआ उस दौरान रिम्स के तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार थे। रिम्स में सीआईडी की छापेमारी के बाद डॉ. राजकुमार ने इस्तीफा दे दिया था। मामले में भी सीआईडी गहनता से जांच कर रही है। मामले में गड़बड़ी निकलती है तो सीआइडी में केस दर्ज हो सकता है।
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