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Supreme Court on CBSE and NEET 2026 Case: सीबीएसई और नीट स्टूडेंट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 2 बड़ी खबरें हैं. एक तरफ सीबीएसई के कॉपी चेक करने के तरीके पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत भड़क गए. वहीं दूसरी तरफ, कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. जानिए सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ.
Supreme Court on CBSE and NEET 2026: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई और नीट के संबंध में बड़े फैसले लिए हैं
नई दिल्ली (Supreme Court on CBSE and NEET 2026 Case). देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से देश के करोड़ों स्टूडेंट्स और उनके परिवारों के लिए 2 बड़ी खबरें सामने आई हैं. कोर्ट ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है. साथ ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 को लेकर भी बड़ा फैसला सुनाया है. इन दोनों ही मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने सोशल मीडिया से लेकर देश के शिक्षा गलियारों तक में हलचल तेज कर दी है.
छोटे बच्चों की निराशा तो देखिए… – CBSE पर भड़के चीफ जस्टिस
सुप्रीम कोर्ट में सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग मूल्यांकन प्रणाली को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही थी. याचिका में बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए नियम तय करने की मांग की गई थी. इसी दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में सीबीएसई से कहा, ‘जरा इन छोटे बच्चों की निराशा को देखिए’.. कोर्ट का इशारा उस तनाव और डर की तरफ था जो गलत मूल्यांकन के कारण स्कूली बच्चों को झेलना पड़ता है.
‘आप विरोधी रुख न अपनाएं’ – कोर्ट की दोटूक
सुनवाई के दौरान बेंच में शामिल जस्टिस बागची ने भी बोर्ड को नसीहत दी. उन्होंने कहा, हम नहीं चाहते कि बोर्ड इस मामले में कोई विरोधी या अड़ियल रुख अपनाए. व्यवस्था में कुछ गंभीर समस्याएं हैं जिन्हें सुधारना जरूरी है. इस संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी मदद मांगी है. कोर्ट ने उनसे अनुरोध किया है कि वे इस मामले में अदालत की सहायता करें और इस व्यवस्था को सुधारने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दें.
NEET UG 2026: दोबारा परीक्षा के खिलाफ याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट से दूसरी बड़ी खबर नीट परीक्षा को लेकर आई है. नीट यूजी पेपर लीक के कारण मई 2026 में हुई नीट यूजी परीक्षा रद्द कर दी गई थी. फिर इसे 21 जून को दोबारा कराने का फैसला हुआ था. एनटीए के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें दोबारा परीक्षा कराने का विरोध किया गया था. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस याचिका को ‘निष्प्रभावी’ मानते हुए खारिज कर दिया है.
‘जब परीक्षा हो चुकी तो अब मुद्दा ही क्या बचा?’
याचिकाकर्ता के वकील जब अपनी दलीलें रख रहे थे तो जस्टिस नरसिम्हा ने बेहद सीधे शब्दों में कहा- नीट यूजी परीक्षा (21 जून को दोबारा) पहले ही हो चुकी है. इसलिए अब इस मुद्दे में कुछ बचा नहीं है. हालांकि, वकील ने कोर्ट को बताया कि उनकी याचिका सिर्फ परीक्षा रोकने को लेकर नहीं थी, बल्कि उन्होंने एनटीए (NTA) के अंदर बड़े संस्थागत सुधारों की भी मांग की है.
सुधारों की लड़ाई में शामिल होंगे याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस याचिका को नीट परीक्षा में हुई धांधली से जुड़ी अन्य बड़ी और लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए. इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने रास्ता निकालते हुए कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो याचिकाओं के दूसरे बैच में शामिल होकर अपनी बात रख सकता है. साफ है कि दोबारा परीक्षा का विरोध करने वाली फाइल तो बंद हो गई है. लेकिन एनटीए की कार्यप्रणाली में सुधार की बड़ी कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the <strong>Education and Career desk</strong>. She is kno…और पढ़ें