ईरान और अमेरिका के बीच दोबारा से तेज होती जंग और हॉर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने समुद्र में काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए मंगलवार को ‘सीफेयरर-फर्स्ट (Seafarer-First)’ पहल की शुरुआत की. इसके तहत फारस की खाड़ी, हॉर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी से गुजरने वाले हर भारतीय नाविक की पल-पल की जानकारी सरकार के पास होगी. यह व्यवस्था इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि जहाज किस देश के झंडे के तहत चल रहा है.
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता करते हुए महानिदेशालय नौवहन (डीजी शिपिंग) को निर्देश दिया कि इन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में चलने वाले प्रत्येक जहाज के लिए एक व्यापक डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जाए.
इस डैशबोर्ड में जहाज की मौजूदा लोकेशन, मालिकाना हक, कार्गो, चालक दल की संख्या, भारतीय नाविकों की स्थिति, सुरक्षा जोखिम, अगला पड़ाव, यात्रा का रूट और आपातकालीन सुविधाओं जैसी सभी अहम जानकारियां रियल टाइम में उपलब्ध रहेंगी. सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संकट की स्थिति में किसी भी भारतीय नाविक तक तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके.
बैठक के दौरान सर्बानंद सोनोवाल ने साफ कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि युद्ध प्रभावित समुद्री क्षेत्र में मौजूद हर भारतीय नाविक का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल मदद उपलब्ध कराई जाए.
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हाल ही में हॉर्मुज स्ट्रेट में दो अमीराती तेल टैंकरों पर मिसाइल हमला हुआ था. इस हमले में भारतीय नाविक रोहन कुमार की मौत हो गई, जबकि कई अन्य भारतीय घायल हुए. दोनों जहाजों पर कुल 46 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 30 भारतीय थे. एमटी अल बहियाह पर हुए हमले में रोहन कुमार की जान चली गई, जबकि एक अन्य नाविक घायल हो गया. वहीं एमटी मोम्बासा पर मौजूद नौ भारतीय भी घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गई.
इस घटना पर दुख जताते हुए सोनोवाल ने नागरिक व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के उल्लंघन का कड़ा विरोध दर्ज कराया है.
सरकार ने प्रभावित प्रत्येक भारतीय नाविक के लिए एक समर्पित संपर्क अधिकारी (लायजन ऑफिसर) नियुक्त करने का भी फैसला किया है. यह अधिकारी नाविकों के परिवारों और सरकारी एजेंसियों के बीच सीधा संपर्क बनाए रखेगा. मेडिकल अपडेट, इलाज, यात्रा दस्तावेज, भारत वापसी, मुआवजा, बकाया वेतन और सीफेयरर्स वेलफेयर फंड से मिलने वाली आर्थिक सहायता जैसी सभी प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी यही अधिकारी संभालेगा.
इसके अलावा भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए 24 घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन व्यवस्था भी शुरू की गई है. टोल-फ्री नंबर, व्हाट्सऐप और ई-मेल के जरिए किसी भी आपात स्थिति में सीधे सरकार से संपर्क किया जा सकेगा.
सरकार ने विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावासों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं. इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा, मेडिकल इवैक्युएशन, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और घटनाओं की जांच से जुड़ी प्रमाणित जानकारी समय पर जुटाना है.
सोनोवाल ने जहाज मालिकों और भर्ती एजेंसियों को भी स्पष्ट निर्देश दिया कि युद्ध प्रभावित क्षेत्र से गुजरने से पहले हर जहाज का नया सुरक्षा आकलन किया जाए. साथ ही किसी भी भारतीय नाविक को पूरी जानकारी, सुरक्षा इंतजाम और आवश्यक सहायता दिए बिना ऐसे संवेदनशील समुद्री मार्ग पर ड्यूटी के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा.
पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात और वैश्विक समुद्री व्यापार पर बढ़ते खतरे के बीच भारत सरकार का यह कदम हजारों भारतीय नाविकों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, हर भारतीय नाविक की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी. (पीटीआई इनपुट के साथ)