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Palamu Teak Farming By Tissue Culture Method: पलामू के सतीश दुबे ने 4 एकड़ में 500 सागवान के पेड़ लगाए और इन्हें लगाने के लिए टिश्यू कल्चर तकनीक का इस्तेमाल किया. केवल 2 साल में उनके पौधे 25-30 फीट ऊंचे हो गए हैं. उनका कहना है कि ठीक देखभाल से 15 सालों में एक पेड़ 1 लाख तक का मुनाफा दे सकता है.
पलामू. आज के दौर में पारंपरिक खेती के साथ अब किसान इमारती पौधों की खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं. कम देखभाल, कम लागत और लंबे समय में बेहतर मुनाफे के कारण सागवान (टीक) की खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बनती जा रही है. खासकर टिश्यू कल्चर सागवान अपनी तेज बढ़वार और अच्छी गुणवत्ता के कारण किसानों को आकर्षित कर रहा है.
ऐसा ही काम पलामू जिले के व्यवसायी एवं प्रकृति प्रेमी सतीश दुबे कर रहे हैं, जिन्होंने अपने चार एकड़ के बागान में टिश्यू कल्चर सागवान लगाकर भविष्य की मजबूत आय का आधार तैयार किया है. उन्होंने अपने 4 एकड़ खेत को इमारती और फलदार वृक्षों का मॉडल बनाया है. ऐसे में सागवान के टिश्यू कल्चर की बढ़ोतरी काफी तेजी से हो रही है.
चार एकड़ में लगाए 500 टिश्यू कल्चर सागवान
नावाबाजार के बसना गांव निवासी सतीश दुबे ने अपने चार एकड़ बागान में नागपुर से मंगाए गए करीब 500 टिश्यू कल्चर सागवान के पौधे लगाए हैं. उनका कहना है कि इन पौधों को लगाए हुए अभी केवल दो वर्ष हुए हैं, लेकिन इनकी ऊंचाई 25 से 30 फीट तक पहुंच चुकी है. टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार पौधों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनकी वृद्धि सामान्य सागवान की तुलना में काफी तेज होती है और पौधों की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है.
15 साल में एक पेड़ दे सकता है लाखों का लाभ
सतीश दुबे ने लोकल18 को बताया कि अगर सागवान के पौधों को लगभग 15 वर्ष तक सुरक्षित रखा जाए, तो एक पेड़ से करीब एक लाख रुपये तक का मुनाफा मिलने की संभावना रहती है. इमारती लकड़ी की लगातार बढ़ती मांग के कारण भविष्य में इसकी कीमत और बढ़ सकती है. ऐसे में यह खेती किसानों के लिए दीर्घकालिक निवेश का बेहतर विकल्प साबित हो सकती है.
शुरुआत में देखभाल जरूरी, बाद में खर्च बेहद कम
उन्होंने बताया कि पौधारोपण के समय हर गड्ढे में 10 से 15 किलोग्राम गोबर की सड़ी हुई खाद और जैविक सामग्री का उपयोग किया गया. शुरुआती दो से तीन वर्षों तक पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण की आवश्यकता होती है. इसके बाद पौधे इतने मजबूत हो जाते हैं कि विशेष देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती. रासायनिक उर्वरकों की भी आवश्यकता बहुत कम होती है, जिससे लागत नियंत्रित रहती है.
किसानों के लिए बेहतर निवेश का विकल्प
उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों के पास अतिरिक्त भूमि उपलब्ध है, वे इमारती पौधों की खेती को आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में अपना सकते हैं. टिश्यू कल्चर सागवान जैसी उन्नत किस्में तेज बढ़वार, बेहतर गुणवत्ता और ऊंची बाजार कीमत के कारण किसानों को लंबे समय में आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं. पलामू में सतीश दुबे का यह बागान इस बात का उदाहरण है कि सही योजना और धैर्य के साथ इमारती पौधों की खेती भविष्य में लाखों रुपये की कमाई का जरिया बन सकती है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें