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India-US Tension: भारत और अमेरिका के रिश्तों में टैरिफ का विवाद एक बार फिर गहराता दिख रहा है. अमेरिकी सीनेट में 60 सांसदों के समर्थन वाला एक नया बिल भारत के लिए चिंता का कारण बन गया है. अगर यह कानून बनता है तो रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर बड़ा असर पड़ सकता है.
अमेरिका में भारत के खिलाफ 60 सांसद एकजुट, 100% टैरिफ वाला बिल क्यों बढ़ा रहा चिंता? (सांकेतिक तस्वीर)
India-US Tension: भारत-अमेरिका के रिश्ते अब भी तल्ख हैं. वजह है टैरिफ. जब भी लगता है कि रिश्ते सुधर रहे हैं, अमेरिका टैरिफ बम फोड़ देता है. टैरिफ के कारण दोनों देशों के रिश्तों की लंका लग चुकी है. भारत के बारे में जहर उगलने वाले अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम को कौन नहीं जानता. अब वह इस दुनिया में नहीं हैं. मगर उनका सबसे चर्चित टैरिफ वाला प्रस्ताव अब भी अमेरिकी संसद में अलग रूप में जिंदा है. उनके प्रस्ताव के चलते ही भारत पर अब भी टैरिफ वाला खतरा मंडरा रहा है. टैरिफ प्रस्ताव के चलते भारत के लिए एक नई चिंता पैदा हो गई है. जी हां, अमेरिकी सीनेट में अब भी भारत के 60 ऐसे भारत विरोधी सांसद बैठे हैं, जो भारत को खतरे में डालने का प्लान बना रहे हैं. अमेरिकी सीनेट में 60 सांसदों ने एक ऐसे विधेयक का समर्थन किया है, जिसमें भारत समेत रूस से तेल खरीदने वाले पांच बड़े देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है. अगर यह कानून बन जाता है तो भारत से अमेरिका जाने वाले कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं और दोनों देशों के व्यापार पर असर पड़ सकता है.
यहां बताना जरूरी है कि अमेरिकी सीनेट में 60 सांसदों का समर्थन का मतलब है प्रस्ताव का पास होना. जी हां, प्रस्ताव पास कराने के लिए 100 सीनेट अगर अपना समर्थन देते हैं तो भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लग जाएगा. यह विधेयक भले ही रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के मकसद से लाया गया है. मगर इसका बुरा असर भारत पर पड़ेगा. अमेरिका का मानना है कि रूस को तेल बेचकर मिलने वाला पैसा यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल हो रहा है. इसलिए जो देश रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं, उन पर भी आर्थिक दबाव बनाने की योजना है. इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं. यह जगजाहिर है कि भारत रूस से काफी समय से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता रहा है. ऐसे में इस प्रस्ताव से भारत को बड़ा नुकसान हो सकता है.
500 से 100 फीसदी पर आई बात
यहां एक बात और गौर करने वाली है. पहले के प्रस्ताव में 500 फीसदी टैरिफ की बात थी. अब इसे घटाकर अधिकतम 100 फीसदी कर दिया गया है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया जाता है तो समझिए यह भारत के लिए बड़ा आर्थिक झटका होगा. गुरुवार को सामने आए इस बिल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला है. सीनेट में बिल का समर्थन करने वालों की मानें तो अगस्त से पहले पास किया जा सकता है.
क्या है भारत को खतरे में डालने वाला यह बिल
चलिए पहले इस बिल को समझते हैं. सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है. इसका मतलब साफ है कि यह झटका लगने वाला है. बहुमत वाली रिपब्लिकन पार्टी के नेता सीनेटर जॉन थ्यून ने बिल के मुख्य समर्थकों में से एक के तौर पर इस पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे ऊपरी सदन में बिल के पास होने की संभावना बढ़ गई है.
इस बिल का नाम है ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2026’. इस बिल में ट्रंप प्रशासन को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है. हालांकि, इस बिल में अमेरिका का दोगलापन साफ दिख रहा है. बिल में यूरोपीय देशों के लिए काफी छूट दी गई है, जो रूस से प्राकृतिक गैस खरीदना जारी रखे हुए हैं.
लिंडसे ग्राहम का दिख रहा बिल में असर
इस बिल को रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने तैयार किया था. ग्राहम के निधन के बाद भी 60 से ज्यादा सांसद इसके साथ खड़े हैं. इससे इसके आगे बढ़ने की संभावना बढ़ गई है. गुरुवार को पेश किया गया बिल ‘2025 सैंक्शनिंग रशिया एक्ट’ का ही एक नरम रूप है. इस एक्ट को पिछले साल अप्रैल में अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया था. इसमें भारत समेत रूस से एनर्जी खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. अब इस टैरिफ को घटाकर 100% कर दिया गया है.
भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?
अब अमेरिका के इस बिल के पास होने से सबसे अधिक खतरा भारत पर मंडरा रहा है. भारत के लिए चिंता इसलिए भी है क्योंकि पिछले कुछ सालों में उसने रूस से सस्ता कच्चा तेल बड़ी मात्रा में खरीदा है. भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर तेल खरीदता है. भारत ने हमेशा यह भी कहा है कि वह किसी एक देश पर निर्भर नहीं है और राष्ट्रीय हित के आधार पर फैसले लेता है. अगर तेल कारोबार की बात करें तो जून में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इसमें महीने-दर-महीने 34% की वृद्धि हुई. जून में रूस से खरीदे गए कच्चे तेल का मूल्य 4.5 बिलियन यूरो था, जो रूस के निर्यात का लगभग 36% था. अगर ऐसे में यह बिल पास होता है तो फिर भारत को बड़ा झटका भी लगेगा और इससे अमेरिका के साथ संबंध और खराब भी होंगे.
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