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जमशेदपुर के विष्णु ने सवाई घास से खड़ा किया लाखों का बिजनेस,...


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Sawai Grass Business: जमशेदपुर के विष्णु ने नदी-तालाब किनारे उगने वाली साधारण सवाई घास और खजूर के पत्तों से हस्तशिल्प उत्पाद बनाकर सफल कारोबार खड़ा किया है. उनके बनाए पेन स्टैंड, ज्वेलरी बॉक्स, ट्रे, फ्लावर वास और सजावटी सामान की मांग झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक पहुंच चुकी है. इस पहल से गांव के 100 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है. खासकर महिलाओं को स्वरोजगार का नया अवसर मिला है.

जमशेदपुर: नदी, तालाब और समंदर के किनारे उगने वाली सवाई घास को अक्सर लोग एक साधारण पौधा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन जमशेदपुर के विष्णु ने इसी घास को अपनी मेहनत, नई सोच और रचनात्मकता के दम पर कमाई का बड़ा जरिया बना दिया है. आज सवाई घास और खजूर के पत्तों से बने उनके हस्तशिल्प उत्पाद कई राज्यों में पसंद किए जा रहे हैं. इस काम से 100 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिला है.

हस्तनिर्मित उत्पाद बनाने की शुरुआत
विष्णु बताते हैं कि उन्होंने सवाई घास और खजूर के पत्तों से हस्तनिर्मित उत्पाद बनाने की शुरुआत छोटे स्तर से की थी. शुरुआती दिनों में लोगों को विश्वास दिलाना आसान नहीं था कि घास और पत्तों से भी आकर्षक और उपयोगी सामान तैयार किया जा सकता है. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार मेहनत करते रहे. धीरे-धीरे लोगों को उनके उत्पाद पसंद आने लगे. इसके बाद मांग लगातार बढ़ती चली गई. आज उनके बनाए उत्पाद सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं हैं. पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में भी इनकी अच्छी मांग है. प्राकृतिक सामग्री से तैयार होने के कारण लोग इन्हें काफी पसंद कर रहे हैं.

कई तरह के आकर्षक उत्पाद तैयार
सवाई घास और खजूर के पत्तों से कई तरह के आकर्षक उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इनमें पेन स्टैंड, ज्वेलरी बॉक्स, ट्रे, फ्लावर वास, सजावटी सामान, हैट और रोजमर्रा के उपयोग की कई अन्य वस्तुएं शामिल हैं. सभी उत्पाद पूरी तरह हाथ से बनाए जाते हैं. यही वजह है कि हर उत्पाद की अपनी अलग पहचान होती है. ये देखने में सुंदर होने के साथ-साथ मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ भी होते हैं.

ये उत्पाद पर्यावरण के लिए भी बेहतर
प्राकृतिक सामग्री से तैयार होने के कारण ये उत्पाद पर्यावरण के लिए भी बेहतर माने जाते हैं. प्लास्टिक के विकल्प के रूप में भी लोग इन्हें तेजी से अपना रहे हैं. यही कारण है कि बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. बढ़ती मांग को देखते हुए विष्णु ने अपने गांव के अन्य लोगों को भी इस काम से जोड़ना शुरू किया. उन्होंने ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया. उन्हें हस्तशिल्प बनाने की तकनीक सिखाई. इससे गांव के कई लोगों को रोजगार मिला. खासकर महिलाओं के लिए यह काम आय का अच्छा माध्यम बन गया.

उत्पादों की कीमत भी कम
विष्णु के अनुसार, आज 100 से अधिक लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस काम से जुड़े हुए हैं. इससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. लोग घर बैठे भी हस्तशिल्प तैयार कर अच्छी कमाई कर रहे हैं. इन हस्तनिर्मित उत्पादों की कीमत भी आम लोगों की पहुंच में रखी गई है. छोटे उत्पाद लगभग 100 रुपये से मिलना शुरू हो जाते हैं. वहीं, बड़े और विशेष डिजाइन वाले उत्पादों की कीमत उनके आकार और डिजाइन के अनुसार तय होती है. कम कीमत, आकर्षक डिजाइन और टिकाऊ गुणवत्ता के कारण ग्राहक इन्हें काफी पसंद कर रहे हैं. लोग इन उत्पादों को घर की सजावट के साथ-साथ उपहार के रूप में भी खरीद रहे हैं.

गांव में भी सकारात्मक बदलाव
विष्णु की यह पहल इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि यदि किसी साधारण प्राकृतिक संसाधन को नई सोच और मेहनत के साथ जोड़ा जाए, तो उससे बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है. सवाई घास जैसी सामान्य दिखने वाली सामग्री को उन्होंने रोजगार, आत्मनिर्भरता और हस्तशिल्प कला से जोड़कर नई पहचान दिलाई है. आज उनका यह प्रयास न केवल कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है, बल्कि गांव के लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला रहा है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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