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नेशनल हाईवे-39 चार साल पहले ही कागज पर बनकर तैयार:रोज 10 लाख...




धरातल पर अब भी अधूरा, कहीं सड़क टूटी तो कहीं नाली गायब दैनिक भास्कर की टीम ने 60 किमी का सफर तय कर गिनी सड़क की खामियां, तिलता-मांडर के बीच सबसे खराब हालात… रांची में सड़क और फ्लाईओवर का जाल बिछ रहा है। ट्रैफिक जाम और सफर को आसान बनाने के लिए यह जरूरी है, लेकिन इसकी गुणवत्ता बरकरार रखना उससे भी अधिक जरूरी है। लेकिन, अधिकतर सड़कों में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है नेशनल हाईवे-39 है। शहर से होकर गुजरने वाले इस हाईवे का निर्माण 4 साल पहले वर्ष 2022 में ही हो चुका है। करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस सड़क में दुर्घटना आम बात है। अधूरी सड़क और पुलिया की वजह से पिछले चार सालों में करीब सात लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 30 लोगों के हाथ-पैर टूटे हैं। क्योंकि, कागज में यह सड़क तो बनकर तैयार हो गई, लेकिन धरातल पर अब भी अधूरी है। दैनिक भास्कर की टीम ने पिस्कामोड़ से कुड़ू के बीच करीब 60 किमी का सफर तय करके रांची-कुड़ू रोड की खामियों को गिना। सफर के दौरान तिलता चौक से मांडर के बीच सड़क काफी खराब मिली। 60 से 80 किमी. की रफ्तार में ही कार हांफने लगी। इतने हिचकोले खाते हुए कार आगे बढ़ रही थी, मानों कच्ची सड़क पर चल रही हो। कई स्थानों पर इतना अधिक उछाल मिला कि अगर वाहन से हल्का भी नियंत्रण हटा तो दुर्घटना होना तय है। वहीं, इसी सड़क पर मांडर में टोल टैक्स की वसूली की जा रही है। पूछने पर टोलकर्मियों ने बताया कि रोजाना करीब 10 लाख रुपए टोल की वसूली होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सड़क आज भी अधूरी है तो फिर टोल किस बात का वसूला जा रहा है। सड़क कई जगह अधूरी, कहीं नाली नहीं बनी तो कहीं गड्ढे दुर्घटना को दे रहे दावत
1. रांची से तिलता ओवरब्रिज तक शहरी क्षेत्र होने की वजह से यातायात सामान्य रहा। तिलता पार करते ही काठीटांड़ चौक पर फोरलेन के दोनों लेन के किनारे वाहनों की कतार मिली। एक ही लेन होने से वाहनों की रफ्तार थम जाती है। इससे आगे पत्ता-मुरगू के बीच जगह-जगह सड़क उखड़ी मिली। हिचकोला खाते हुए वाहन सवार जाने को विवश हैं। 2. मुरगू पुल छह माह पहले ही बनकर तैयार हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस पुल के अधूरा रहने से 4 साल में सात लोगों की मौत हो चुकी है। दर्जनों के हाथ-पैर टूटे हैं। आगे बढ़ने पर मालटोटी पुल के पास कार अचानक उछलने लगी। क्योंकि एप्रोच रोड धंसा हुआ है। यही स्थिति टेढ़ा पुल, पकरियो पुल के पास भी दिखी। 3. मुडमा, ब्राम्बे, कंदरी और मांडर के लगभग सभी चौक पर फोरलेन ही पार्किंग में बदल चुकी है। मांडर बाजारटांड़ स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने करीब सौ मीटर तक सड़क किनारे वाहनों की कतार लगी थी। सर्विस रोड नहीं बनने की वजह से हाईवे ही पार्किंग बन गया है। इस वजह से यहां वाहनों की रफ्तार थम जाती है। 4. बीजूपाड़ा से आगे बढ़ने पर सोस चौक पर सड़क अचानक संकरी हो जाती है। क्योंकि, यहां एक लेन ही सड़क बनी हुई है। लोगों ने पूछने पर बताया कि जमीन विवाद की वजह से चौड़ीकरण अधूरा छोड़ दिया गया। पंडरी में मस्जिद के पास एक लेन का निर्माण अब भी अधूरा पड़ा है। वापसी में दूसरी लेन का हाल भी लगभग यही था। 5. मांडर टोल प्लाजा पार करने के बाद भी हालात नहीं बदले। टेढ़ा पुल के पास फिर धंसा एप्रोच और बड़ा उछाल मिला। इसके बाद बीजूपाड़ा पहुंचने पर खलारी रोड जंक्शन पर नाली टूटी दिखी। उसका सरिया बाहर निकला हुआ था। सड़क पर गहरा गड्ढा बन गया है। वहां दुकानदारों ने बताया कि निर्माण के कुछ दिन बाद ही ड्रेन टूट गया था। तब से कई बाइक चालक गिर चुके हैं, वाहन फंस चुके हैं। बड़ा सवाल : टोल वसूल रहे, पर कोई सुविधा नहीं
सबसे हैरानी की बात यह रही कि इस रोड पर एनएचएआई टोल वसूल रहा है, लेकिन यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं दी गई है। कहीं ढंग का यात्री शेड नहीं है। न पर्याप्त सूचना बोर्ड लगा है। कहीं आपातकालीन सहायता की व्यवस्था नहीं और न ही व्यवस्थित कैफेटेरिया। टोलकर्मियों ने बताया कि रोजाना करीब 8000 वाहन इस रोड से गुजरते हैं। फिर भी सड़क का रखरखाव व सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। कांट्रेक्टर बहाल हो गया, जल्द होगी मरम्मत
नेशनल हाईवे में कुछ स्थानों पर काम अधूरा रह गया है, उसे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। सड़क जहां डैमेज है, उसकी मरम्मत जल्द होगी। इसके लिए कांट्रेक्टर बहाल हो गया है। सड़क पर जहां अधिक उछाल है, उसकी भी मरम्मत कराई जाएगी, ताकि वाहन सवारों को दिक्कत न हो। – विजय कुमार सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई, रांची



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