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वोट बैंक की राजनीति या किसानों की मजबूरी? न बुलडोजर चल रहा...




भास्कर न्यूज | गढ़वा बाजार समिति जिसे किसानों को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने और कृषि उपज के बेहतर विपणन के उद्देश्य से विकसित किया गया था, आज अतिक्रमण, गंदगी और प्रशासनिक लाचारगी का शिकार बन गई है। वर्षों से बाजार समिति की भूमि पर अवैध कब्जा होने के कारण किसान खुले आसमान के नीचे अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, समिति को हर माह लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार बाजार समिति परिसर में बड़ी संख्या में लोगों ने अवैध रूप से दुकानें और मड़ई बनाकर कब्जा कर लिया है। कुछ माह पूर्व बाजार समिति प्रशासन ने ऐसे 88 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की तैनाती कर अतिक्रमण हटाने की तैयारी भी की, लेकिन स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण अभियान बीच में ही रुक गया और अतिक्रमण जस का तस बना रहा। अतिक्रमण के कारण सबसे अधिक परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि बाजार समिति में पर्याप्त शेड होने के बावजूद वे उनका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। मजबूरी में उन्हें खुले मैदान में धूप, बारिश और ठंड के बीच सब्जियां, फल और अन्य कृषि उत्पाद बेचने पड़ते हैं। बरसात के दिनों में पूरा परिसर कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है। वहीं भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे बैठना उनकी मजबूरी बन जाती है। अतिक्रमण के चलते बाजार समिति की आय भी लगातार प्रभावित हो रही है। समिति की भूमि पर अवैध कब्जा होने से नियमित रूप से दुकान आवंटन और अन्य शुल्क की वसूली नहीं हो पा रही है। इससे सरकार और बाजार समिति को हर साल लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि अतिक्रमण हट जाए तो बाजार समिति की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और किसानों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। बाजार समिति में अतिक्रमण के साथ-साथ गंदगी की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। प्रतिदिन हजारों किसान और ग्राहक यहां पहुंचते हैं, लेकिन परिसर में जगह-जगह कचरे का अंबार लगा रहता है। सड़े हुए फल-सब्जियों और अन्य अपशिष्ट से उठने वाली दुर्गंध के कारण दुकानदारों और ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी रहती है। नोटिस जारी हुआ था, पर नहीं हो सकी कार्रवाई इस संबंध में बाजार समिति के पणन सचिव राजीव रंजन ने बताया कि 88 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था और अतिक्रमण हटाने के लिए मजिस्ट्रेट की भी नियुक्ति हुई थी, लेकिन स्थानीय राजनीतिक कारणों से कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कुछ सप्ताह पहले इस संबंध में उपायुक्त को दोबारा पत्र भेजा गया है। जल्द ही मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर दोबारा अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जाएगा। कचरा प्रबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि समिति प्रशासन समय-समय पर सफाई कराता है, लेकिन कुछ स्थानीय दुकानदार सफाई के बाद फिर वहीं कचरा फेंक देते हैं, जिससे समस्या दोबारा उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने सभी दुकानदारों और आम लोगों से बाजार समिति को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग की अपील की।



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