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सतबरवा में ग्रेफाइट भंडार का ग्रेड 7.7 कार्बन वाला है
सतबरवा प्रखंड में खामडीह और पूर्णाडीह के बीच 12 मिलियन टन उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट का भंडार मिला है। यह पलामू प्रमंडल में अब तक का सबसे बड़ा ग्रेफाइट भंडार है। खनन एवं भूतत्व विभाग के उपनिदेशक राजेंद्र उरांव ने बताया कि इस साल जनवरी-फरवरी में सतबरवा क्षेत्र में ड्रिलिंग के दौरान ग्रेफाइट होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद डीजीपीएस सर्वे और डिमार्केशन का काम पूरा किया गया। इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभाग को सौंप दी गई है। इस भंडार का ग्रेड 7.7 कार्बन वाला है। बंद माइंस फिर शुरू करने की तैयारी
ग्रेफाइट की वैश्विक मांग बढ़ने से पलामू में बंद पड़ी माइंस फिर से शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है। 80 के दशक में वन अधिनियम लागू होने से चांदो सोकरा क्षेत्र की प्रसिद्ध माइंस बंद हो गई थी। डाल्टनगंज विधायक आलोक चौरसिया ने बताया कि सोकरा माइंस चालू कराने के लिए बातचीत चल रही है। सतबरवा में नया भंडार मिलने से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी। अन्य प्रखंडों में भी सर्वे
खनन विभाग अब अन्य प्रखंडों में भी सर्वे कर रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि पलामू के विभिन्न इलाकों में और भी उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट भंडार मिल सकते हैं। वहीं जो भंडार मिले हैं, उसकी नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निजी कंपनियां यहां निवेश करेंगी। इससे क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। ग्रामीणों की मांग है कि खनन शुरू होने से पहले स्थानीय लोगों को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण में प्राथमिकता दी जाए। लिथियम बैटरी और परमाणु क्षेत्र के लिए संजीवनी
पलामू में मिला ग्रेफाइट लिथियम बैटरी, परमाणु उद्योग, इलेक्ट्रिसिटी, स्टील के फर्नेस में भी उपयोग किया जाता है। आम तौर पर लोग ग्रेफाइट को पेंसिल बनाने की सामग्री समझते हैं। इसकी सबसे बड़ी मांग अब लिथियम आयन बैटरी और परमाणु रिएक्टरों में है। इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते चलन के कारण ग्रेफाइट की मांग अगले 10 सालों में कई गुना बढ़ने का अनुमान है।- संतन चक्रवर्ती जियोलॉजिस्ट
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