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झारखंड में निबंधित अधिवक्ता लिपिक ( मुंशी) की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 2 लाख रुपए की सहायता मिलेगी। अभी यह राशि 50 हजार रुपए है। इसे लागू करने के लिए झारखंड अधिवक्ता लिपिक कल्याण निधि अधिनियम, 2018 में संशोधन किया जाएगा। राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में यह संशोधन विधेयक पारित कराएगी। अभी इनके आश्रितों को झारखंड अधिवक्ता लिपिक कल्याण कोष से सहायता दी जाती है। इसके अलावा जिला बार एसोसिएशन भी अनुकंपा सहायता देता है। गौरतलब है कि अधिवक्ता लिपिक कल्याण निधि अधिनियम वकीलों के अधीन काम करने वाले निबंधित मुंशी या लिपिकों को सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से बनाया गया कानून है। इसके लिए कल्याण कोष का गठन किया गया है।इस कोष के प्रबंधन के लिए उच्चस्तरीय समिति है। झारखंड स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन इसके अध्यक्ष होते हैं। वहीं विधि सचिव, गृह सचिव और वित्त सचिव इसके सदस्य हैं।
सक्रिय सेवा से रिटायर होने के बाद पंजीकृत लिपिकों को पेंशन या एकमुश्त सहायता राशि देने का प्रावधान है। दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में भी चिकित्सा सहायता दी जाती इसका लाभ लेने के लिए मान्यता प्राप्त अधिवक्ता लिपिक निधार्रित फॉर्म भरकर सदस्य बन सकता है। ऐसे जमा होता है फंड
कोर्ट, ट्रिब्यूनल या अथॉरिटी में दाखिल होने वाले हर वकालतनामा या मेमोरेंडम पर 5 रुपए का विशेष स्टांप अनिवार्य है। इसकी बिक्री से आने वाला पैसा सीधे इसी फंड में जाता है। आवेदन शुल्क, सदस्यता शुल्क और बार काउंसिल या अन्य संस्थाओं से मिलने वाला स्वैच्छिक दान भी इस फंड का हिस्सा बनता है।
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