भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Karnataka High Court News: देश में पहली बार! हाईकोर्ट की 7 बेंचों...


न्यूज18 कन्नड़
Karnataka High Court News: देश की न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है. लेकिन अब कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ पीठ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे भारतीय न्यायिक इतिहास का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. पहली अगस्त से धारवाड़ बेंच के सभी सात कोर्ट रूम में सिर्फ महिला जज ही न्यायिक कार्यवाही करेंगी. यानी एक भी पुरुष न्यायाधीश इस रोस्टर का हिस्सा नहीं होगा. हाईकोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब किसी हाईकोर्ट की पूरी बेंच का कामकाज पूरी तरह महिला न्यायाधीशों के हाथ में होगा. यह फैसला केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भूमिका, उनकी क्षमता और नेतृत्व पर बढ़ते भरोसे का भी प्रतीक माना जा रहा है. इस ऐतिहासिक रोस्टर को लेकर न्यायिक जगत, वकीलों और महिला संगठनों में उत्साह का महीनेौल है. इसे न्याय व्यवस्था में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है.

धारवाड़ बेंच में लागू होने जा रहे इस नए रोस्टर ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अब तीन डिवीजन बेंच और चार सिंगल बेंच समेत कुल सातों अदालतों में केवल महिला न्यायाधीश ही मामलों की सुनवाई करेंगी. खास बात यह है कि यह फैसला किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभू बखरू के उस आदेश का हिस्सा है, जिसे बार एसोसिएशन की मांग के बाद लागू किया गया. अंतरराष्ट्रीय महिला महीने के अवसर पर महिला प्रतिनिधित्व को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है. न्यायपालिका में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसी हाईकोर्ट की पूरी पीठ का पूरी तरह महिला न्यायाधीशों के हाथ में जाना अब तक कभी नहीं हुआ था. ऐसे में धारवाड़ बेंच का यह रोस्टर आने वाले समय में अन्य अदालतों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है.

ऐतिहासिक रोस्टर ने रचा नया इतिहास

  • कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ बेंच के लिए जारी किया गया नया रोस्टर भारतीय न्यायिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ता है. 1 अगस्त से लागू होने वाले इस रोस्टर के तहत सभी सात अदालतों में केवल महिला न्यायाधीश ही बैठेंगी. इनमें तीन डिवीजन बेंच और चार सिंगल बेंच शामिल हैं. यह पहली बार है जब किसी हाईकोर्ट की पूरी कार्यवाही एक साथ केवल महिला जजों की निगरानी में संचालित होगी.
  • यह फैसला केवल अदालतों के संचालन तक सीमित नहीं है. इसका संदेश इससे कहीं बड़ा माना जा रहा है. लंबे समय तक न्यायपालिका में पुरुषों का वर्चस्व रहा है, लेकिन अब महिला न्यायाधीशों की संख्या और उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं. धारवाड़ बेंच का यह रोस्टर इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है.
  • मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभू बखरू ने आधिकारिक रोस्टर आदेश जारी करते हुए सभी सात अदालतों की जिम्मेदारी महिला न्यायाधीशों को सौंपी है. इस आदेश के बाद न्यायिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है. कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि यह फैसला महिलाओं की योग्यता और न्यायिक नेतृत्व पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है.

बार एसोसिएशन की मांग पर लिया गया फैसला

इस ऐतिहासिक बदलाव के पीछे बार एसोसिएशन की पहल को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय महिला महीने के अवसर पर धारवाड़ बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया था कि न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को एक मजबूत संदेश देने के लिए विशेष रोस्टर तैयार किया जाए. इस अनुरोध पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभू बखरू ने नया रोस्टर जारी किया. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.डी. हीरेमठ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल महिला न्यायाधीशों का सम्मान नहीं, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र में समान अवसरों की भावना को मजबूत करने वाला कदम है.

महिला न्यायाधीशों के नेतृत्व में चलेगी पूरी कार्यवाही

1 अगस्त से धारवाड़ बेंच की तीन डिवीजन बेंच और चार सिंगल बेंच पूरी तरह महिला न्यायाधीशों के नेतृत्व में काम करेंगी. इसका मतलब यह है कि पूरे दिन की न्यायिक कार्यवाही में किसी भी अदालत में पुरुष न्यायाधीश शामिल नहीं होंगे. भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला महिलाओं की क्षमता और न्यायिक नेतृत्व पर बढ़ते भरोसे का प्रतीक है. इससे युवा महिला वकीलों और कानून की पढ़ाई कर रही छात्राओं को भी नई प्रेरणा मिलेगी.

न्यायपालिका में बढ़ रही है महिलाओं की भागीदारी

पिछले कुछ वर्षों में देश की न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की संख्या लगातार बढ़ी है. सुप्रीम कोर्ट से लेकर विभिन्न हाईकोर्ट और जिला अदालतों तक महिलाओं की भागीदारी पहले की तुलना में मजबूत हुई है. हालांकि, अभी भी कुल न्यायाधीशों की संख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है. ऐसे में धारवाड़ बेंच का यह फैसला केवल प्रतीकात्मक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संस्थागत बदलाव की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न्यायपालिका में विविधता और प्रतिनिधित्व दोनों को मजबूती मिलेगी.

देशभर में हो रही फैसले की चर्चा

धारवाड़ बेंच का नया रोस्टर सामने आने के बाद न्यायिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर इसकी चर्चा तेज हो गई है. कई पूर्व न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और महिला संगठनों ने इसे ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कदम बताया है. उनका कहना है कि न्याय देने की क्षमता किसी लिंग पर निर्भर नहीं करती और यह फैसला उसी सोच को मजबूत करता है. साथ ही यह संदेश भी देता है कि देश की सर्वोच्च संस्थाओं में महिलाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारियां देने का दौर अब और तेज होगा.

क्या बोले मुख्य न्यायाधीश और बार एसोसिएशन?

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभू बखरू द्वारा जारी रोस्टर आदेश के अनुसार, ‘1 अगस्त से धारवाड़ बेंच के सभी सात न्यायालय कक्षों में महिला न्यायाधीशों की पीठ न्यायिक कार्यवाही का संचालन करेगी.’

वहीं, धारवाड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.डी. हीरेमठ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय महिला महीने के अवसर पर बार एसोसिएशन द्वारा किए गए अनुरोध को स्वीकार करना एक ऐतिहासिक और प्रगतिशील निर्णय है. यह न्यायपालिका में महिलाओं की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएगा.’

इस फैसले के साथ धारवाड़ बेंच भारतीय न्यायिक इतिहास में एक नई मिसाल कायम करने जा रही है. यह केवल एक प्रशासनिक रोस्टर नहीं, बल्कि न्यायपालिका में लैंगिक समानता, नेतृत्व और अवसरों के विस्तार का मजबूत संदेश भी है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top