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बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल (होटवार) के परिसर में कैदी अब अपराध का रास्ता छोड़कर आत्मनिर्भरता का नया पाठ सीख रहे हैं। कैदी घरेलू व सूती सामान जैसे बेडशीट, चादर, गमछा, कंबल और दरी बना रहे हैं, तो स्वच्छता उत्पाद की चीजें साबुन और फिनाइल भी बना रहे हैं। खाद्य उत्पादों में सरसों का शुद्ध तेल बना रहे हैं, तो ऑफिस स्टेशनरी के रूप में फाइल और रजिस्टर तैयार कर रहे हैं। बंदियों द्वारा तैयार सरसों तेल की बाजार में सबसे ज्यादा मांग है, स्टॉल पर आते ही इसका स्टॉक खत्म हो जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में जेल प्रशासन को 5 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ, जिसे राज्य सरकार के फंड में जमा कराया गया। राज्य के सभी जेलों और जिला अदालतों को फाइलों व रजिस्टरों की सप्लाई लागत मूल्य पर की जा रही है। सिर्फ सरसों तेल बेचकर 65 हजार का अतिरिक्त मुनाफा कमाया
कैदियों द्वारा तैयार किए जा रहे सामान की क्वालिटी इतनी बेहतरीन है कि बाजार में इसकी भारी मांग है। तैयार सामान को केवल 5 प्रतिशत के मामूली मुनाफे पर शहर के तीन अलग-अलग स्टॉलों पर बेचा जा रहा है। जेल प्रशासन के अनुसार, कैदियों द्वारा पेरा गया शुद्ध सरसों तेल स्टॉल पर पहुंचते ही बिक जाता है। इन उत्पादों को बाजार में बेचकर जेल प्रशासन ने एक साल में 65 हजार रुपए का मुनाफा कमाया है, जिसे आगे और बढ़ाने की योजना है। अब बाहरी ऑर्डर लेने को भी जेल प्रशासन तैयार
जेल प्रशासन का कहना है कि यदि बाहर से कोई प्राइवेट या सरकारी ऑर्डर मिलता है, तो उस पर भी काम किया जाएगा। इसके लिए ग्राहक को थोड़ा समय पहले सूचित करना होगा। शहर में 3 जगहों पर लग रहे स्टॉल शहर में 3 जगहों पर लग रहे स्टॉल
सिविल कोर्ट स्थित 40 कोर्ट बिल्डिंग,
होटवार जेल परिसर के बाहर
डीपाटोली कैदियों की शिक्षा और क्षमता के हिसाब से ट्रेनिंग
होटवार जेल में कैदियों को उनकी क्षमता के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि जब वे बाहर जाएं तो सम्मान के साथ जीवन जी सकें। – जे. चंद्रशेखर, जेल सुपरिंटेंडेंट
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