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भास्कर न्यूज | सरायकेला बाल संरक्षण एवं किशोर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार, सिविल कोर्ट परिसर में जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश -सह- डीएलएसए अध्यक्ष रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। बैठक में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बीरेश कुमार, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1 ब्रज किशोर पांडेय, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2 दीपक मलिक, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लूसी सोसेन तिग्गा, सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग)-सह-एसडीजेएम आशीष अग्रवाल तथा डीएलएसए के सचिव तौसीफ मेराज सहित विभिन्न विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सचिव तौसीफ मेराज ने किशोर न्याय अधिनियम, किशोर न्याय बोर्ड की कार्यप्रणाली तथा बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास और कल्याण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। वहीं, उप मुख्य विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता सुनीत कर्मकार ने पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षित रखने में सभी संबंधित विभागों की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। जन सहभागी विकास केंद्र, रांची के चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्सपर्ट पीयूष सेनगुप्ता ने बाल बचाव अभियानों के अनुभव साझा करते हुए रेस्क्यू अभियान, पुनर्वास की चुनौतियों और संस्था के कार्यों की जानकारी दी। बैठक में सामाजिक सुरक्षा प्रकोष्ठ, जिला बाल संरक्षण इकाई और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी भाग लिया। बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने आपसी समन्वय बढ़ाकर बाल संरक्षण तंत्र को और मजबूत बनाने तथा प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।
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