Last Updated:
नॉर्थ इंडिया में पहली बार नोएडा के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक रोबोटिक HIFU (फोकल वन) तकनीक की शुरुआत की गई है. यह तकनीक उन मरीजों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जिनका कैंसर केवल प्रोस्टेट तक सीमित है. इस इलाज में न तो शरीर पर चीरा लगाया जाता है, न टांके लगते हैं और न ही रेडिएशन की जरूरत पड़ती है. रोबोटिक सिस्टम की मदद से डॉक्टर कैंसर वाले हिस्से की सटीक पहचान कर केवल उसी ट्यूमर को नष्ट करते हैं
नोएडा: नॉर्थ इंडिया में पहली बार नोएडा के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक रोबोटिक HIFU (फोकल वन) तकनीक की शुरुआत की गई है. यह तकनीक उन मरीजों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जिनका कैंसर केवल प्रोस्टेट तक सीमित है. इस इलाज में न तो शरीर पर चीरा लगाया जाता है, न टांके लगते हैं और न ही रेडिएशन की जरूरत पड़ती है. रोबोटिक सिस्टम की मदद से डॉक्टर कैंसर वाले हिस्से की सटीक पहचान कर केवल उसी ट्यूमर को नष्ट करते हैं, जबकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों को सुरक्षित रखा जाता है.
प्रोस्टेट कैंसर के मुख्य लक्षण
मैक्स हॉस्पिटल के यूरोलॉजी विभाग के ग्रुप चेयरमैन डॉ. राजेश अहलावत ने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में शामिल है. उम्र बढ़ने, जागरूकता और जांच बढ़ने के कारण भारत में भी इसके मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार पेशाब के लिए उठना, पेशाब करने में कठिनाई, पेशाब की धार कमजोर होना, पेशाब या वीर्य में खून आना, पेशाब के दौरान जलन या दर्द तथा कमर, कूल्हों या हड्डियों में लगातार दर्द शामिल हो सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत यूरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए.
यौन क्षमता रहती है सुरक्षित
डॉक्टर सचिन नटराज की मानें तो पारंपरिक इलाज जैसे सर्जरी या रेडिएशन प्रभावी तो हैं, लेकिन इनमें कई मरीजों को इलाज के बाद मूत्र असंयम (यूरिन कंट्रोल की समस्या) और यौन क्षमता प्रभावित होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. वहीं नई रोबोटिक HIFU तकनीक केवल कैंसरग्रस्त हिस्से को निशाना बनाती है, जिससे स्वस्थ ऊतक अधिक सुरक्षित रहते हैं. इसी वजह से उपयुक्त मरीजों में यौन क्षमता (सेक्सुअल पावर) को सुरक्षित रखने की संभावना 70 प्रतिशत अधिक रहती है. जबकि पुराने उपचार के सामने आया कि 70 प्रतिशत तक मरीजों की यौन क्षमता प्रभावित हो सकती है, जबकि इस तकनीक से अधिकांश मरीजों में इसे बचाए रखने की संभावना बेहतर होती है.
2 दिन में ही मरीज का जीवन सामान्य
डॉक्टर प्रांजल गुप्ता और मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के वाइस प्रेसिडेंट एवं यूनिट हेड अरविंद पाहवा की मानें तो इस तकनीक का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह डे-केयर प्रक्रिया है. यानी मरीज का इलाज कुछ घंटों में पूरा हो सकता है और अधिकांश मामलों में वह उसी दिन अस्पताल से घर जा सकता है. आमतौर पर 1 से 2 दिन के भीतर मरीज अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकता है. कम दर्द, कम जटिलताएं, तेजी से रिकवरी और अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहने जैसी खूबियों के कारण इसे प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. और HIFU फोकल वन तकनीकी द्वारा इलाज करने उत्तर भारत में मैक्स अस्पताल ने उपलब्ध हांसिल की है.
About the Author
Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
और पढ़ें