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Protest Against JPSC: झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी सेवा आयोग के खिलाफ छात्र संगठन पिछले एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों ने आयोग में परीक्षा पर सवाल उठा रहे हैं. सीबीआई की जांच की मांग कर रहे हैं. छात्र प्रमुख रूप 14वीं JPSC कंबाइंड सिविल सर्विसेज परीक्षा और परिणाम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके साथ ही पेपर लीक होने और OMR शीट टेंपरिंग के आरोप लगा रहे हैं.
रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करते छात्र. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद अब झारखंड की राजधानी रांची में भी हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. छात्रों का आरोप है कि कई भर्ती परीक्षाओं में OMR शीट में टेंपरिंग, पेपर लीक, रिजल्ट में गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं. छात्र झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग को लेक प्रदर्शन कर रहे हैं. सैकड़ों छात्र और सरकारी नौकरी के उम्मीदवार रांची में एक हफ़्ते से ज़्यादा समय से भारी बारिश के बावजूद अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा. यही वजह है कि रांची में लगातार धरना-प्रदर्शन और विरोध मार्च आयोजित किए जा रहे हैं.
क्या है पूरा मामला?
रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि हाल में आयोजित कुछ सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. इसकी लेटेस्ट वजह 14वीं JPSC कंबाइंड सिविल सर्विसेज़ परीक्षा से जुड़ा है. सबसे बड़ा आरोप OMR शीट में कथित छेड़छाड़ (टेंपरिंग) का है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोग(JPSC) ने 103 वैकेंसीज के लिए विज्ञापन निकाला था और जुलाई की शुरुआत में प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे घोषित करने के बाद मुख्य परीक्षा के लिए 2204 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया था. हालांकि, नतीजे आने के तुरंत बाद ही उम्मीदवारों ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाना शुरू कर दिया. छात्रों की मुख्य चिंताओं में से एक यह थी कि कैटेगरी-वाइज़ कट-ऑफ मार्क्स जारी नहीं किए गए थे. प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जारी की गई मेरिट लिस्ट पर कमीशन के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे, जिससे रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे. ट
डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक सफल उम्मीदवार की बताई जा रही OMR आंसर शीट वायरल होने के बाद यह विवाद और बढ़ गया. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उम्मीदवार ने केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे – जो 144 अंकों के बताए गए क्वालिफाइंग स्कोर से काफी कम था. फिर भी उसे मुख्य परीक्षा (MAINs) के लिए शॉर्टलिस्ट कर लिया गया. हालांकि OMR शीट की असलियत की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने जांच की मांग को और तेज कर दिया है.
जेपीएससी और जेएसएससी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए छात्र.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा के बाद कुछ अभ्यर्थियों के मार्क्स और OMR शीट के रिकॉर्ड में अंतर पाया गया. कई छात्रों का दावा है कि उनकी आंसरशीट का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं हुआ, जबकि कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया. इसके अलावा कुछ परीक्षाओं में पेपर लीक की आशंका भी जताई जा रही है. छात्रों का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए थे. हालांकि संबंधित एजेंसियां इन आरोपों की जांच की बात कह रही हैं.
OMR टेंपरिंग क्या होती है?
Optical Mark Recognition(OMR) वह तकनीक है जिसके जरिए कैंडिडेंट्स के भरे गए आंसर को मशीन रीड करती है और मार्क्स देती है. अगर परीक्षा के बाद किसी अभ्यर्थी की OMR शीट में अवैध रूप से बदलाव कर दिया जाए, उत्तर बदल दिए जाएं या स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया में छेड़छाड़ की जाए, तो इसे सामान्य भाषा में OMR टेंपरिंग कहा जाता है. यदि ऐसा साबित हो जाए तो पूरी परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठ जाता है.
दुमका में प्रदर्शन करते हुए छात्र.
रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैंः
- पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच कराई जाए.
- 14वीं JPSC कंबाइंड सिविल सर्विसेज परीक्षा को कैंसिल करें और दोबारा एग्जाम कराया जाए.
- जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी की आशंका है, उनकी फोरेंसिक जांच कराई जाए.
- सभी अभ्यर्थियों की OMR शीट सार्वजनिक की जाए.
- दोषी अधिकारियों और परीक्षा माफिया के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो.
- भविष्य की परीक्षाओं में डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाई जाए.
- जरूरत पड़ने पर विवादित परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए.
जंतर-मंतर से रांची तक कैसे पहुंचा आंदोलन?
हाल में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई राज्यों के छात्रों-अभ्यर्थियों ने नीट पेपर लीक समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ प्रदर्शन किया था. वहां छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग उठाई थी. अब उसी मुद्दे को लेकर झारखंड के छात्र भी आंदोलन कर रहे हैं. उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियां केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर की समस्या बन चुकी है.
छात्र CBI जांच की मांग क्यों कर रहे हैं?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य स्तर की जांच एजेंसियों पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं है. उनका आरोप है कि यदि मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित रहा तो सच्चाई सामने आने में मुश्किल होगी. इसी वजह से वे चाहते हैं कि CBI जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी पूरे मामले की जांच करें.
पेपर लीक क्यों बन रहा है बड़ी चुनौती?
- पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं. इससे लाखों उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी है.
- पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों को होता है. वर्षों की मेहनत के बावजूद यदि परीक्षा की सीक्रेसी खत्म हो जाए तो पूरा सेलेक्शन प्रोसेस शक के घेरे में आ जाता है.
- छात्र अब केवल दोषियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एग्जाम सिस्टम में व्यापक सुधार की मांग भी कर रहे हैं.
सरकार का क्या कहना है?
सरकार और संबंधित भर्ती एजेंसियों का कहना है कि छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है. यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी के प्रमाण मिलते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों का यह भी कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी सुधारों पर काम किया जा रहा है.
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रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर भी का…
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