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नोवामुंडी आदिवासी एसोसिएशन भवन में बुधवार को अध्यक्ष घनश्याम हेम्ब्रम की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। पूर्व विधायक सह झारखंड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष मंगल सिंह बोबोंगा ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र को नगर निकाय में शामिल करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि सरकार ने नोवामुंडी, झींकपानी, गुवा और मनोहरपुर को नगर निकाय में शामिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों से मंतव्य मांगा है। इस फैसले से क्षेत्र के आदिवासी-मूलवासी की पहचान, पारंपरिक सुशासन और जमीन-जंगल के अधिकार प्रभावित होंगे। नोवामुंडी क्षेत्र मुख्य रूप से आदिवासी-मूलवासियों का बहुल क्षेत्र है। यहां पीढ़ियों से ग्राम सभा और पारंपरिक व्यवस्था के तहत शासन चलता आ रहा है। नगर निकाय में शामिल करने से पंचायत और ग्राम सभा के अधिकार कमजोर होंगे। नगर निकाय बनने से पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के तहत मिले अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने आशंका जताई। उन्होंने बताया कि बाहरी लोग यहां बसने के बाद जनगणना में अपना नाम दर्ज कराने की होड़ में लगे हैं। नोवामुंडी को जबरन नगर निकाय में शामिल करना हमारे अस्तित्व पर हमला है। झारखंड पुनरुत्थान अभियान के प्रमुख सन्नी सिंकु ने कहा कि नोवामुंडी की अलग संस्कृति और परंपरा है। नगर निकाय में विलय से इसे नुकसान पहुंचेगा। नगर निकाय विभाग के सचिव ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में असंवैधानिक तरीके से नगर निकाय के लिए आदेश जारी किया है। बैठक में निर्णय लिया गया। बताया गया कि इस विषय को लेकर सरकार बात नहीं मानती है तो झारखंड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा व झारखंड पुनरुत्थान अभियान के बैनर पर आंदोलन किया जाएगा। बैठक में जगदीश सिंकु, झारखंड पुनरुत्थान अभियान के प्रखंड अध्यक्ष अभिषेक सिरका, गौतम मिंज, मतियास सुरेन, गोमा सुरेन, केशव गोप, अजय पुरती, अल्बर्ट मुंडा, विश्वनाथ बोबोंगा, विकास केराई आदि उपस्थित थे।
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