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देश में एक से बढ़कर एक ऐसे तीर्थस्थल हैं जहां की अपनी मान्यताएं और परंपराएं हैं. ये मान्यताएं और परंपराएं वर्षों से चली आ रही हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी लोग इनका पालन कर रहे हैं. कई मंदिर तो ऐसे हैं जो अंग्रेजों के जमाने से भी पुराने हैं और वहां आज भी पूजा-पाठ जारी है. ऐसा ही मंदिर बोकारो में है जहां हर साल नई प्रतिमा बनती है.
कैलाश कुमार/बोकारो: झारखंड के जिले के चंदनक्यारी प्रखंड के झलबरदा गांव में स्थित जय मां मनसा मंदिर आस्था और अनोखी परंपरा का केंद्र है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर में अंग्रेजों के जमाने से भी पहले से मां मनसा की पूजा-अर्चना होती आ रही है. खास बात यह है कि यहां हर साल मां मनसा की नई प्रतिमा तैयार की जाती है, लेकिन प्रतिमा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की पाट को विसर्जन के बाद भी सुरक्षित रखा जाता है. अगले वर्ष उसी पाट पर फिर से मां मनसा की नई प्रतिमा बनाई जाती है.
मनसा पूजा के दौरान झलबरदा सहित आसपास के गांवों और दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. पूजा के साथ यहां करीब एक सप्ताह तक मेले का आयोजन भी किया जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल रहता है.
मिट्टी की झोपड़ी से भव्य मंदिर तक का सफर
मंदिर समिति के सदस्य जयदेव केवट बताते हैं कि मंदिर की स्थापना की परंपरा काफी पुरानी है. शुरुआती दौर में यहां मिट्टी की झोपड़ी बनाकर मां मनसा की प्रतिमा स्थापित की जाती थी और ग्रामीण मिलकर पूजा-अर्चना करते थे लेकिन, करीब 10 वर्ष पहले मंदिर का पुनर्निर्माण कर इसे भव्य स्वरूप दिया गया है.
आगे उन्होंने बताया कि हर साल 17 अगस्त से मां मनसा की पूजा-अर्चना शुरू होती है. पूजा की शुरुआत तालाब से बेलबरन की परंपरा के साथ होती है इसके बाद विधि-विधान से मां मनसा की पूजा की जाती है और मंदिर में बकरे की बलि की परंपरा भी वर्षों से चली आ रही है.
विसर्जन के बाद भी सुरक्षित रखी जाती है लकड़ी की पाट
इस मंदिर की सबसे खास परंपरा इसकी प्रतिमा से जुड़ी है पूजा समाप्त होने के बाद मां मनसा की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है, लेकिन प्रतिमा जिस लकड़ी की पाट पर बनाई जाती है, उसे मंदिर में सुरक्षित रखकर दोबारा स्थापित किया जाता है और अगले वर्ष पूजा से कुछ दिन पहले इसी पाट पर फिर से मां मनसा की नई प्रतिमा तैयार की जाती है
कई पीढ़ियों से मंदिर में हो रही पूजा
मंदिर के पुजारी लखन बताते हैं कि वह पिछले चार वर्षों से यहां पूजा-अर्चना करा रहे हैं. उनके अनुसार, उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस मंदिर में मां मनसा की पूजा करते आए हैं. यही वजह है कि मंदिर से स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था काफी गहरी जुड़ी हुई है. श्रद्धालु मधुसूदन बताते हैं कि आसपास के गांवों के लोगों की मां मनसा देवी में विशेष आस्था है. उनका मानना है कि सच्चे मन से मां के दरबार में मनोकामना लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है. यही विश्वास हर साल श्रद्धालुओं को मंदिर तक खींच लाता है.
आस्था के साथ मेले का भी आकर्षण
मनसा पूजा के दौरान मंदिर परिसर में लगने वाला सप्ताहभर का मेला भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है. इस दौरान झलबरदा गांव में खास चहल-पहल देखने को मिलती है.
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