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TMC Leader Ashish Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव उनके घर में बने टीएमसी ऑफिस में फंदे से लटका मिला. रामपुरहाट में बनर्जी के आवास के पास स्थित पार्टी ऑफिस से एक कथित ‘सुसाइड नोट’ भी बरामद हुआ है. ममता सरकार में आशीष बनर्जी मंत्री भी रह चुके थे.
आशीष बनर्जी टीएमसी से पांच बार विधायक रहे थे. (फाइल फोटो)
TMC Leader Ashish Banerjee Death: पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ राजनेता और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व विधायक आशीष बनर्जी का शव रविवार को बीरभूम जिले के रामपुरहाट में उनके आवास स्थित कार्यालय से मिला. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है. ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले आशीष बनर्जी के शव के पास ही एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें उन्होंने खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर बात की है.
दिसंबर 2025 से तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी (टीआरडीए) को लेकर लगातार आरोप लग रहे थे. उस समय, वह रामपुरहाट के विधायक थे. ‘सुसाइड नोट’ में आशीष बनर्जी ने लिखा, “TRDA के मामले में मेरी एकमात्र जिम्मेदारी आम बैठकों में शामिल होना था. मैं टेंडर कमेटी का हिस्सा नहीं था. मेरे पास चेक पर साइन करने का अधिकार नहीं था. मैं बिल्डिंग प्लान को मंजूरी देने या ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ जारी करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं था. किसी ने भी इन मामलों पर मुझसे कभी कोई चर्चा नहीं की. मुझे बदनाम करने के लिए की गई हरकतों की मैं निंदा करता हूं.”
विवाद क्या है?
दिसंबर 2025 से तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी को लेकर लगातार आरोप लगाए जा रहे थे. उस समय, रामपुरहाट के मौजूदा विधायक ने भ्रष्टाचार के आरोप सामने रखे थे. इसके बाद, मंदिर के एक सेवक (सेबायत) निखिल बंद्योपाध्याय (बनर्जी) ने मंदिर से जुड़े कई मुद्दों पर शिकायतें दर्ज कराईं. आरोप इस प्रकार थे:
1) स्वर्गीय शिबशंकर मुखोपाध्याय ने ‘तारामाता सेबायत संघ’ (मंदिर सेवकों का संगठन) की स्थापना की थी. एक नियम बनाया गया था कि कोई व्यक्ति अधिकतम तीन साल तक संघ का अध्यक्ष रह सकता है; हालाँकि, वही व्यक्ति 15 साल से इस पद पर बना हुआ है. मंदिर में अनियमितताओं को देखते हुए, ज़िला मजिस्ट्रेट बिधान रॉय ने एक सलाहकार समिति का गठन किया. हालांकि उस समिति में निखिल बंद्योपाध्याय का नाम शामिल था, लेकिन उन्हें कभी भी बैठक के लिए नहीं बुलाया गया.
2) करोड़ों रुपये जमा होने के बावजूद, यह पैसा मंदिर के खाते में जमा नहीं किया जाता है. विकास कार्य शुरू होने पर सभी सेवकों (सेबायतों) को सूचित नहीं किया जाता है. इसके अलावा, मंदिर की अपनी आय ही इसके व्यापक विकास के लिए पर्याप्त हो सकती है; इसके बजाय, मुख्य उद्देश्य तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी को विकास कार्य सौंपकर अनियमितताओं के ज़रिए धन का दुरुपयोग करना लगता है.
3) आरोप है कि मंदिर परिसर के भीतर कई छोटे मंदिरों (श्राइन) को बिना ज़रूरत के तोड़ दिया गया और हटा दिया गया. पाँच साल के भीतर दो मंजिला ऑफिस बिल्डिंग को क्यों तोड़ा गया और फिर उसे एक मंज़िला इमारत के तौर पर क्यों बनाया गया? सोलर-पावर्ड ‘भोग-घर’ (धार्मिक प्रसाद पकाने की रसोई) बनाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन यह प्रोजेक्ट कभी पूरा नहीं हुआ. आरोप यह भी है कि पूरी तरह से ठीक-ठाक चल रहे ‘भोग-घर’ को तोड़कर और मुख्य मंदिर के ठीक बगल में नया ‘भोग-घर’ बनाकर मंदिर की सुंदरता को खराब कर दिया गया है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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