भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले में मानसून की बेरुखी के बीच अगस्त माह में बारिश ने कुछ हद तक किसानों को राहत दी है। जून और जुलाई की तुलना में अगस्त में वर्षा की रफ्तार तेज रही है। हालांकि अब भी बारिश सामान्य से कम है, लेकिन पिछले दो महीनों की स्थिति को देखते हुए अगस्त में हुई बारिश ने खेती-किसानी की उम्मीदों को मजबूत किया है। 20 अगस्त तक जिले में 223.2 मिलीमीटर वर्षापात दर्ज किया गया है। अगस्त माह का सामान्य वर्षापात 278.2 मिलीमीटर है। इस तरह अब तक सामान्य से 55 मिलीमीटर बारिश कम हुई है। माह के शेष दस दिनों में अच्छी बारिश होने पर सामान्य वर्षापात का आंकड़ा पूरा होने की उम्मीद है। जिला कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून माह में बारिश की स्थिति बेहद खराब रही थी। जून में सामान्य वर्षापात 138.8 मिलीमीटर के विरुद्ध महज 15.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी। यानी सामान्य से 123.2 मिलीमीटर कम बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद जुलाई में बारिश में कुछ सुधार हुआ, लेकिन यह भी सामान्य से काफी पीछे रही। जुलाई माह में 362.4 मिलीमीटर सामान्य वर्षापात के विरुद्ध 212.8 मिलीमीटर बारिश हुई थी। लगातार दो महीने बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की खेती पर पड़ा था। बारिश बढ़ी तो धनरोपनी ने भी पकड़ी रफ्तार : अगस्त में बारिश की रफ्तार बढ़ने का असर धनरोपनी पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जुलाई माह तक जिले में धनरोपनी की स्थिति बेहद चिंताजनक थी। जिले में 56,400 हेक्टेयर भूमि में धनरोपनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध जुलाई तक महज 2,410 हेक्टेयर भूमि में ही धनरोपनी हो सकी थी। यह लक्ष्य का मात्र 4.27 प्रतिशत था। इससे किसानों के साथ कृषि विभाग की भी चिंता बढ़ गई थी। अगस्त में बारिश होने के बाद धनरोपनी के काम में तेजी आई है। 20 अगस्त तक जिले में 31,250 हेक्टेयर भूमि में धनरोपनी पूरी हो चुकी है। यह निर्धारित लक्ष्य का 55.41 प्रतिशत है। यानी अगस्त में किसानों ने बड़े पैमाने पर खेतों में धान की रोपाई शुरू कर दी है। बारिश की उपलब्धता बढ़ने से खेतों में पानी जमा होने लगा, जिसके बाद धनरोपनी की गति में भी तेजी आई। शेष दिनों पर टिकी किसानों की उम्मीद : बारिश और धनरोपनी के आंकड़ों में सुधार के बावजूद किसानों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगस्त के अभी दस दिन शेष हैं। किसानों को उम्मीद है कि इस दौरान अच्छी बारिश हुई तो न केवल अगस्त का सामान्य वर्षापात पूरा होगा, बल्कि धनरोपनी का आंकड़ा भी और ऊपर जाएगा। हालांकि खरीफ फसल के लिए अब बारिश का हर दिन महत्वपूर्ण है। किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बारिश ही तय करेगी कि इस वर्ष जिले में खरीफ फसलों की स्थिति कितनी बेहतर हो पाती है। जिनके धान के पौधे बड़े हो गए हैं वो खेतों में पानी रोकें बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा के कृषि एवं वानिकी संकाय के डीन डॉ अशोक कुमार ने कहा है कि अभी भी किसान भाई कहीं-कहीं धनरोपनी समाप्त नहीं किए हैं जो चिंता का कारण है। अब धनरोपनी में जैसे-जैसे देर होगा, उपज धीरे-धीरे कम होती जाएगी। जिन खेतों में धान हरा हो गया हो और बढ़वार ले रहा हो उनमें पानी रोकना शुरू कर दें। क्योंकि हो सकता है आगे लंबा समय तक बिना बारिश वाला समय आए। क्योंकि अलनीनो अभी भी प्रबल है। टांड़ वाले फसलों से पानी निकास की व्यवस्था बनाए रखें। धान, मक्का एवं तेलहनी फसलों में रोपाई या बुवाई के 30 दिनों के बाद अनुशंसित यूरिया का छिड़काव करें।
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