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दशकों तक मलेरिया जोन के रूप में चिन्हित रहे सिमडेगा जिले में मलेरिया का प्रकोप एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। पिछले दो वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मलेरिया मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 में जिले में जहां कुल 344 मलेरिया मरीज मिले थे,वहीं वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 461 पहुंच गया। वर्ष 2026 में जुलाई माह तक ही जिले में 229 मलेरिया मरीजों की पहचान हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक मरीज बानो प्रखंड में मिले हैं। विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में अकेले बानो प्रखंड में 206 मलेरिया मरीज मिले थे। वर्ष 2025 में यहां मरीजों की संख्या बढ़कर 340 हो गई। वहीं वर्ष 2026 के जुलाई माह तक बानो प्रखंड में 151 मरीज मिल चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि जिले में मलेरिया के मामले में बानो प्रखंड कार्यालय लगातार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है। जुलाई तक विभिन्न प्रखंडों में मिले मरीज : वर्ष 2026 के जुलाई माह तक बानो के अलावा सिमडेगा प्रखंड में 11, कोलेबिरा में 8,जलडेगा में 39,कुरडेग में 2,बोलबा में 7 तथा ठेठईटांगर प्रखंड में 11 मलेरिया मरीज मिले हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले के कुछ प्रखंडों में मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम है,जबकि बानो और जलडेगा में मामले अधिक सामने आए हैं। सीमा से सटे होने के कारण बानो और जलडेगा में ज्यादा मामले : जिला मलेरिया सलाहकार सुशांत कुमार ने बताया कि मलेरिया की रोकथाम को लेकर लगातार जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को मलेरिया की जांच और उपचार के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधाएं उपलब्ध हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में मलेरिया की जांच और दवाइयां निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बानो और जलडेगा प्रखंड सिंहभूम जिले की सीमा से सटा हुआ है। सीमा से लगे क्षेत्रों में आवागमन और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बानो प्रखंड में मलेरिया के मरीजों की संख्या अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से मलेरिया के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच कराने की अपील की गई है। बुखार को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने पर जोर दिया जा रहा है।
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